आइआइटी जेइइ मेन :बिहार के साधारण परिवार से आये इन विद्याथियो ने लहराया सफलता का परचम

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सपने संजोये व कम उम्र में हासिल की सफलता

आइआइटी जेइइ मेन की परीक्षा आठ जनवरी से होने वाली है. युवाओं का सपना होता है कि वह इंजीनियर बने, लेकिन, ज्यादातर बच्चों को यह पता नहीं होता है कि वे इसके लिए क्या करें? कब और कैसे तैयारी करें? जो बच्चे अपने भविष्य को लेकर सतर्क और समर्पित होते हैं, वे सफलता पा लेते हैं. बिहार के सत्यम कुमार, दिल्ली के सलह कौशिक,  फिरोजाबाद के अभय अग्रवाल ऐसे ही सफल छात्र हैं, जिन्होंने छोटी उम्र में ही इस परीक्षा को पास कर एक मिसाल कायम की. ये छात्र बहुत ही साधारण परिवारों से आते हैं. इस साल की जेइइ मेंस की परीक्षा में शामिल हाे रहे छात्रों को सफलता की इनकी कहानी से प्रेरणा मिल सकती है.  

बिहार के सत्यम ने 13 साल की उम्र में किया था आइआइटी क्रैक

साल 2013 में बिहार के सत्यम कुमार ने 13 साल की उम्र में ही आइआइटी-जेइइ पास करने का कारनामा कर दिखाया. आइआइटी-जेइइ की प्रवेश परीक्षा में उसने देशभर में 679वां स्थान हासिल किया था.  भोजपुर जिले के बाखोरापुर गांव के रहने वाले सत्यम ने बताया कि उसने पहले सीबीएसइ की विशेष अनुमति से आइआइटी-जेइइ की परीक्षा पास की थी और 8,137वां स्थान हासिल किया था. उसने दोबारा परीक्षा दी और यह सफलता हासिल की. सत्यम के पिता छोटे किसान हैं. सत्यम के पास कोचिंग में देने के लिए भी पैसे नहीं थे. कोटा के एक कोचिंग संस्थान ने उसकी मदद की और फ्री में तैयारी करायी. लोगों ने हतोत्साहित किया लेकिन हार नहीं मानी साल 2017 में यूपी के फिरोजाबाद के रहने वाले 15 साल के अभय अग्रवाल की कामयाबी की कहानी कुछ अलग ही है.

अभय के अनुसार वह स्कूल के पास किराये के एक मकान में रहा

कर पढ़ाई करता था. उस दौरान कुछ लोगों ने उसे काफी हतोत्साहित किया, लेकिन अभय ने उस ओर ध्यान नहीं दिया. आइआइटी-जेइइ में सफलता हासिल कर उसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला पक्का कर लिया. अभय ने देश में 2,467वीं रैंकिंग हासिल की.

14 वर्षीय सहल ने देश भर में हासिल किया था 33वां स्थान

2010 में दिल्ली के सहल कौशिक ने 14 साल की उम्र में आइआइटी प्रवेश परीक्षा में देशभर में 33वां और दिल्ली क्षेत्र में पहला स्थान हासिल किया था. वह फिजिक्स से बीएससी करना चाहता था, ताकि एस्ट्रो- फिजिक्स में अनुसंधान कर सके. उसने बताया कि सफलता पाने के लिए अपने कॉन्सेप्ट पर पकड़ रखने की जरूरत होती है. उसके पिता तारकेश्वर कौशिक भारतीय सेना में कर्नल और मां रुचि कौशिक डॉक्टर हैं. मां ने डॉक्टरी छोड़ घर पर ही उसे आइआइटी की तैयारी करवायी.


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