सुपौल में उपमुख्यमंत्री ने बास आधारित उद्योग केंद्र का उद्धघाटन किया ।

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सुपौल सीमित संसाधनों के बावजूद बीएनएमयू प्रगति पथ पर निरंतर अग्रसर है। “हम दिन प्रतिदिन आगे बढ़ रहे हैं, यह पादप ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला सह उत्पादन केन्द्र हमारी प्रगति का एक बेजोड़ नमूना है” यह बात बीएनएमयू के कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय ने कही। बुधवार को बीएसएस काॅलेज, सुपौल में पादप ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला सह उत्पादन केन्द्र के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने इस केन्द्र के निर्माण एवं उद्घाटन के लिए बिहार सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और आशा व्यक्त किया कि सरकार आगे भी इस पिछड़े इलाके के विकास पर प्रयाप्त ध्यान देगी।

सुशील मोदी ने कहा बास गरीब की लकड़ी होती है ।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इस केन्द्र में बांस के पौधे तैयार किए जाएंगे और उसे कम कीमत पर किसानों को मुहैया कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हर इलाका अलग-अलग चीजों के दिए खास होता है। कोसी बांस के लिए खास इलाका है। बांस मिट्टी का कटाब रोकता है। इससे की विभिषिका को कम होती है। बांस के घर भूकंपरोधी होते हैं।

प्रधानमंत्री की खेती को प्रोत्साहित करते है

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बांस को हरा सोना कहा है, बांस गरीब की लकड़ी है। यह बुढ़ापा में हमारी लाठी बनता है, और जीवन की अंतिम यात्रा में अर्थी भी इससे बनाई जाती है। भारत सरकार ने बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 1290 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। बिहार सरकार सामाजिक वानिकी के तहत कोसी सहित पूरे राज्य में बांस की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद हम बिहार में बांस नीति बनाएंगे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बांस की खेती को उद्योग से जोड़ा जाएगा, साथ ही अररिया में बांस किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए एक केन्द्र खुलेगा।

ऊर्जा मंत्री ने कहा रोजगार के साधन खुलेंगे ।

मुख्य अतिथि उर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि इस केन्द्र के उद्घाटन से कोसी क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा, यह यहाँ की जनता के लिए एक वरदान की तरह है। उर्जा मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया में बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह एक उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है, और इसका एक बड़ा बाजार है। उर्जा मंत्री ने बताया कि बांस यह पिपल से भी अधिक आॅक्सिजन देता है। बांस के माध्यम से ईख से सात गुना ज्यादा इथनाॅल प्राप्त किया जा सकता है। एक एकङ बांस लगाकर करीब 14 लाख रूपए प्रति वर्ष की आमदनी की जा सकती है।

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