सहरसा से सकरी- झंझारपुर के बीच इस साल के अंत तक पूरा होगा सिग्नलिंग कार्य, पूजा के साथ रेलवे ने शुरू किया सिग्नल वर्क।

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अब कोशी महासेतु होकर ट्रेन चलने का सपना जल्द पूरा होने की उम्मीद नजर आने लगी है। सहरसा से सकरी तक इसी साल के दिसंबर महीने में सिग्नल लगाने का कार्य पूरा होगा। पंचगछिया और गढ़ बरुआरी में सिग्नल लगाने का काम चल रहा है। झंझारपुर में सिग्नल का काम मंगलवार से शुरू हुआ। जिसका डीएसटीई (निर्माण) डी. के. चांद ने नारियल फोड़ भूमि पूजन करते शुभारंभ किया। डीएसटीई ने कहा कि झंझारपुर के बाद सरायगढ़ और सकरी में सिग्नल लगाने का कार्य किया जाएगा। इसी साल दिसंबर महीने तक सहरसा से सकरी तक सिग्नल का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। केबल भी बिछा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर तक सहरसा से सुपौल तक सिग्नल का कार्य पूरा करने की योजना है। पंचगछिया, गढ़ बरुआरी और सुपौल सेक्शन में चल रहे केबल कार्य की मॉनिटरिंग कर रहे डीएसटीई ने कहा कि अभी पंचगछिया और गढ़ बरूआरी में सिग्नल का कार्य चल रहा है। इसके बाद सुपौल में सिग्नल लगाने का कार्य किया जाएगा। एएसटीई संजीव कुमार ने कहा कि करीब 90 प्रतिशत तक सिग्नल वर्क (कार्य) सहरसा से पंचगछिया तक पूरा कर लिया गया है। बता दें कि गढ़ बरुआरी से आगे आमान परिवर्तन कार्य पूरा करते ट्रेन सेवा बहाल करने की तैयारी चल रही है। इसी कड़ी में सिग्नल विभाग भी संबंधित कार्यों को पूरा करने में जुट गया है।

अक्टूबर में सुपौल और दिसंबर में सरायगढ़ तक पूरा होगा आमन परिवर्तन कार्य

इस साल के अक्टूबर में गढ़ बरूआरी से सुपौल और दिसंबर में सरायगढ़ तक आमान परिवर्तन कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मंडन मिश्र से झंझारपुर तक दिसंबर 2019, कोसी पुल पर बचे कार्य को फरवरी 2020 और निर्मली, झंझारपुर से लौकहा बाजार तक मार्च 2021 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरायगढ़ से छातापुर रोड तक मार्च 2020 और छातापुर रोड से फारबिसगंज तक आमान परिवर्तन कार्य मार्च 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि सहरसा-फारबिसगंज-सरायगढ़-सकरी-निर्मली-लौकहा बाजार (206 किमी) आमान परिवर्तन कार्य की लागत राशि 1474 करोड़ है।

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