मधेपुरा में मिला इंसेफलाइटिस के लक्षण, बच्चें का इलाज सहरसा में किया जा रहा, जाने डॉक्टर ने इस बीमारी और इसके बचाब के बारे में क्या कहा

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अभी तक माना जा रहा था कि सिर्फ मुजफ्फरपुर एवं उसके आस पास के इलाकों में ही चमकी बुखार का कहर है लेकिन मधेपुरा के उदाकिशुनगंज के हेरापट्टी में चमकी बुखार का मामला सामने आया है। बच्चे की उम्र लगभग 3 वर्ष है जिसका इलाज पिछले 3 दिनों से सहरसा में चल रहा है। सहरसा के देव हॉस्पिटल में बच्चे का इलाज चल रहा है।

सहरसा के डॉक्टर ने जाने इस बीमारी के बारे में क्या कहा

सहरसा के जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विजेंद्र देव ने इंसेफलाइटिस यानि चमकी बुखार के बारे में कहा कि बहुत सी बीमारियों का एक साथ बच्चें के शरीर मे आ जाने से ब्रेन का फंक्शन काम करना बंद कर देता है जिसे बच्चें की हालत बिगड़ जाने से कई बार मौत भी हो जाती है। डॉक्टर विजेंद्र देव ने बीमारी के लक्षण के बारे में बताया कि ,बच्चों का बुखार आना, बुखार के बाद चमकी ( शरीर मे कंपन) और चमकी के बाद बेहोश हो जाना इसके लक्षण है। डॉक्टर ने बताया कि यदि बच्चा चमकी आने के बाद बेहोश नही होता, खेलने कूदने लग जाता है वो ठीक है अगर बेहोश हो जाता है तो इंसेफलाइटिस के लक्षण है। डॉक्टर ने कहा कि यह जानलेवा बीमारी है यदि इसके लक्षण दिखे तो नजदीकी डॉक्टर से तुरंत सलाह ले।

जाने डॉक्टर ने बीमारी के लक्षण के बारे में क्या है।

डॉक्टर विजेंद्र देव ने इंसेफलाइटिस के लक्षण के बारे में कहा कि बच्चे को बुखार आना, बुखार के बाद चमकी आना या दौरे लगना भी कहते है आम बोल चाल की भाषा मे इसे दाती लगना भी कहा जाता है और इसके बाद बच्चे का बेहोश हो जाना अगर बच्चा होश में तो वो सही से नही है मतलब की बच्चा सही से बोल नही पा रहा, खाने पीने में दिक्कत है तो ये इंसेफलाइटिस यानी चमकी बुखार के लक्षण है ।

इंसेफलाइटिस के रोकथाम के बारे में डॉक्टर की सलाह

इंसेफलाइटिस की रोक थाम के लिए टीकाकरण जरूरी है। डॉक्टर ने जापानी इंसेफलाइटिस के बारे में कहा कि इसे टिकाकरण से रोका जा सकता है। बीमारी के लिये एन्टी वायरल ट्रीटमेंट से किया जा सकता है। डॉक्टर ने कहा कि यदि बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहे पोषण अच्छे से हो, आस पास के इलाकों में पीने का पानी साफ हो तो इससे इस बीमारी के रोकथाम में मदद मिलेगी। बच्चों के कुपोषण को बड़ी बजह बताया।

सिर्फ मुजफ्फरपुर ही नही पूरे उत्तर बिहार में इंसेफलाइटिस का कहर

डॉक्टर ने कहा कि मुजफ्फरपुर में मीडिया कवरेज ज्यादा है इसलिए वहां इंसेफलाइटिस का प्रकोप लोगो को ज्यादा दिख रहा है। उन्होनें कहा कि इंसेफलाइटिस के मरीज सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया में भी हर साल आते है। ये बीमारी हमारे उत्तरी बिहार में भी है।

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