रक्षाबंधन का त्यौहार धूमधाम से संपन्न ! महावीर मंदिर रहा आकर्षक का केंद्र ।

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सहरसा: रक्षा बंधन का त्यौहार सहरसा में धूमधाम से मनाया गया। सहरसा में रक्षाबंधन के दिन झूलन मेले का आयोजन होने से इस पर्व की खासियत बढ़ जाती है। दूर दूर से लोग इस मेले को देखने आते है। सहरसा में रक्षा बंधन के दिन छोटे बच्चो में रखी का ज्यादा क्रेज देखने को मिला, बच्चे नए कपड़े पहन कर कलाइयों में राखी बांध कर सुबह से मेले में घूमते नजर आए। वहीं त्यौहार के अवसर पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है।

महावीर मंदिर

मिथिला में रक्षाबंधन की शुरुआत

लोगो का कहना है कि 1990 के बाद मिथिला में रक्षाबंधन व्यापक रूप से मनाया जाने लगा, टीवी आने के बाद ही लोगो ने एक दूसरे की देखकर रखी बांधने का त्योहार मानना शूरू कर दिया। उससे पहले राखी के दिन मंदिर के पुरोहित या पंडित जी को राखी बांधी जाती थी। लोग मंदिर में भगवान को राखी परिवार की रक्षा करने के लिए चढ़ाते थे, वक़्त बदलने के साथ साथ इस त्योहार का स्वरूप भी बदलता गया ।

महावीर मंदिर में 30 सालो से मेले का होता है आयोजन

मेले के आयोजक अशोक ठाकुर ने बताया कि इस मंदिर में झूलन मेले का आयोजन 30 साल पहले शुरू किया गया था, शुरुवात में कृष्ण जी की मूर्ति स्थापित की जाती थी। धीरे धीरे स्वरूप बदला तथा कलाकारों के द्वारा भगवान कृष्ण से जुड़ी लीलाओं को दिखाया जाने लगा। इस मेले का आयोजन लोगो के श्रमदान से आयोजित होता है और यह मेला कृष्ण जन्माष्टमी तक चलता है। लाखों की संख्या में भक्त इस मेले को देखने आते है ।

झूलन मेले की झलकियां ।


झूलन मेले में भगवान शिव और पार्वती की झलकियां आकर्षक का केंद्र रही । बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने के लिए उमड़े थे ।

समुन्द्र मंथन

मेले में समुन्द्र मंथन की मूर्ति लगाई गई है। जब भगवान और दानवों के बीच अमृत पाने को लेकर मंथन किया जा रहा था।

भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप में, जब उन्होंने पूतना राक्षस का बध किया था।

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