एनसीपी को राज्यसभा उपाध्यक्ष का पद ऑफर कर सकती हैं कॉग्रेस।

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18 जुलाई से मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा हैं, ऐसे मे देश की निगाहें राज्यसभा पर विशेष तौर पर लगी हैं। मामला हैं राज्यसभा के उपाध्यक्ष चुनाव का। फिलहाल इन चुनाव को लेकर राजनीति चरम पर हैं। राजनीति गलियारों में इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई मानी जा रही हैं, जो की पक्ष और विपक्ष के बीच लड़ी जा रही हैं। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस पद पर अपने उम्मीदवार को देखना चाहती हैं, लेकिन सीटों का गणित ऐसा है कि इनमें से कोई भी अपने दम पर किसी उम्मीदवार को जिताने में सक्षम नहीं है। राज्यसभा के समीकरण ऐसे है,जहां सहयोग के बिना उपसभापति के चुनाव के समीकरण को साधना अंसभव हैं।

लोकसभा के उपाध्यक्ष चुनाव मे भी बीजेपी के सहयोग से एआईएडीएमके ने कामयाबी हासिल की थी। ऐसे में एनडीए और यूपीए में इन बड़ी पार्टियों के सहयोगी दलों ने भी इस पद पर अपनी निगाहें गड़ा दी हैं। फिलहाल समीकरण भी इसी और ईशारा कर रहे हैं बड़ी पार्टियों ने भी इस मामले में बड़ा दिल दिखाने का संकेत दिया है। खबर है कि कांग्रेस एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को ये पद ऑफर कर सकती है। मालूम हो की राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को खत्म हो हैं, ऐसे मे अगामी सत्रर के लिहाजा नए उपसभापति को लेकर राजनीतिक गुणा-गणित का खेल शुरू हो चुका है।

कांग्रेस की तरफ से संकेत मिल रहे हैं कि वह अपना उम्मीदवार तो नहीं उतारेगी, पर एनसीपी को उपसभापति के पद का प्रस्ताव दे सकती है। ऐसे में उपाध्यक्ष का उम्मीदवार एनसीपी से हो सकता हैं। कॉग्रेस भी फिलहाल इस पर सकरात्मक रूख अपना रही हैं। दरअसल कांग्रेस दिखाना चाहती है कि उसका दिल बड़ा है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव तक उसके लिए विपक्ष को एकजुट रखना चाहती हैं। जिसके लिए इस चुनाव को उचित अवसर के तौर पर कॉग्रेस ले रही हैं। कॉग्रेस पार्टी चाहती है कि उपसभापति का पद वो किसी सहयोगी दल को ऑफर करे और इसमें एनसीपी उसे सबसे मुफीद लगती है।

फिलहाल एनसीपी के अलावा कॉग्रेस के पास ममता बनर्जी के पार्टी से भी उम्मीदवार देने का विकल्प खुला हैं। ममता बनर्जी की टीएमसी को इस मामले में सपोर्ट करने को लेकर कॉग्रेस में कुछ शंका भी हैं जिनका कांग्रेस के साथ काम करने को लेकर कोई अच्छा रिकॉर्ड नहीं रहा है। यूपीए-2 की सरकार से बीच में ही समर्थन वापस ले चुकी थीं। एनसीपी के एक नेता ने स्वीकार किया है कि कांग्रेस ने अनौपचारिक रूप से इस सिलसिले में पार्टी से बात की है। लेकिन अभी इस सिलसिले में कुछ ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आया है। फिलहाल बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच उपाध्यक्ष चुनाव बहुत ही रोचक हो चला हैं और विपक्ष की जीत 2019 चुनावों में संजीवनी का काम करेंगी।

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