मोदी सरकार के रेलवे में निजीकरण के फैसले के विरोध में उतरे ट्रेड यूनियन,रेल कोच फैक्टरियों को निगम में बदलने की तैयारी,

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मोदी सरकार द्वारा रेलवे के निजीकरण करने के विरोध के स्वर अब खुल कर सामने आने लगे है। ट्रेड यूनियन द्वारा रेलवे के निजीकरण करने का खुलकर विरोध किया और कहा कि ट्रेड यूनियनों को अपनी ताकत दिखाने का सही समय आ गया है। रेलवे के निजीकरण का सर्वव्यापी विरोध करना चाहिए इसके रेलवे के सभी संगठनों AIRTU, NFIR, AIRF, BRMS,IREF , AILRSA, AIGC,RKTA एवं तमाम टुकड़ों में बँटे संगठनों से निवेदन है कि सभी को एक साथ मिलकर ,एक स्वर में एक बैनर के नीचे रेलवे निजीकरण की नीतियों के लिए भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट करना चाहिए।

कई रेल फैक्टरियों को निगम में बदलने की तैयारी

जब रेल ही नहीं रहेगी,तो संगठन कहाँ से बचेगी। आपको देखते ही देखते आपकी आंखों के सामने पुरी रेलवे की सफाई व्यवस्था ठेके पर चली गई। इंजीनियरिंग विभाग आधे से अधिक ठेका पर चल रहा है। रनिंग रूम के सभी काम ठेके पर हो रहे हैं और हम और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गए। इससे ठेकेदार की मनमानी और रेलवे कर्मचारियों के साथ झगड़ा विवाद आम बात हो गई।
अब रेलवे की सबसे बड़ी प्रोडक्शन यूनिट Intrigal coach factory Chennai ,
Rail coach factory kapurthala ,
Diesel locomotive workshop varanasi,MCF,DMW, CLW को Private sector में दिया जा रहा है। जहाँ रेलवे का GM नहीं बल्कि किसी कंपनी का CMD होगा। रेल कर्मचारी निगम कर्मचारी कहलाएंगे।

विरोध अब नहीं तो कब

मुनाफे में चल रही राजधानी , शताब्दी, दूरन्तो एक्सप्रेस गाडिय़ों को IRCTC को बेचने जा रहे हैं मतलब रेलवे का खाना बनाने वाली कंपनी अब खुद रेल चलाएगी।
भारत जैसे देश में बेरोजगारी एक बहुत विकट समस्या है रेलवे भारत भारत में सबसे बडी रोजगार प्रदाता है उसका निजीकरण करके देश के माध्यम वर्ग को रोजगार से बेदखल कर रहे हैं। यह देश विरोधीकदम बहुत ही घातक सिध्द होगा।

16 लाख कर्मचारियों की जगह आप 10लाख कर्मचारियों से काम करवा रहे हो । रोज नित नई-नई गाडियाँ चला रहे हो । रेल लाइन बिछा रहे हो और कर्मचारी घटाते जा रहे हो ।
निजीकरण करने के लिए रेल कर्मचारियों को बदनाम कर कामचोर बता रहे हो।

क्योंकि………
रेलवे है तो हम हैं

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