बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज निर्माण अगले लोक सभा चुनाव (2024) तक टला

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सहरसा । सहरसा की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा जिसपर 2014 से लेकर अब तक नेता एक झूठी उम्मीद दे रहे थे कि निर्माण जून से चालू होगा या टेंडर की प्रक्रिया कुछ दिनों में हो जाएगी सब वादों पर पूर्ण विराम रेलमंत्री ने लगा दिया है।
आप को बता दे कि 2014 चुनाव के पूर्व उस समय के संसद शरद यादव ने चुनाव पूर्व शिलान्यास करा मिट्टी जांच के नाम पर कुछ दिनों के लिए मशीन मंगाई थी,लेकिन चुनाव आते आते मशीन और नेताजी दोनों ही गायब हो गए। मधेपुरा सांसद पप्पू यादव जो पहले ही घोसना कर चुके है कि अगर बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज नहीं बना तो वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नन्द किशोर यादव ने जून तक हर हाल में बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज पर काम चालू करने की बात कहीं थी। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने रेलमंत्री पीयूष गोयल को बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज निर्माण में हो रही देरी पर पत्र लिखा था, जिसके जवाब में रेलमंत्री ने कहा कि सहरसा बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज लेबल क्रॉसिंग 31 राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। 10 नवंबर 2014 को हुए रेल मंत्रालय और एनएचएआई के बीच हुए समझौते के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सभी ऐसे लेबल क्रॉसिंग का निर्माण रेलवे बोर्ड और ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे जिसका विभाग नितिन गड़कारी के पास है मिल कर कराएगी ।लेकिन समझोते के अनुसार 2014 से 2018 अा गया पर काम चालू नहीं ही पाया ,सहरसा बंगाली बाज़ार रेल ओवरब्रिज नहीं बनने से जाम की समस्या ने बिकराल रूप ले लिया है ,लेकिन ना राज्य सरकार ,ना केंद्र सरकार को इससे मतलब है,स्थानीय नेता बस चुनाव के वक्त नजर आते है फिर 5 साल तक गायब हो जाते है। जनता से मुद्दो से सरकार किसी को नहीं।

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