देशभर मे पुरानी पेंशन बहाली को लेकर व्यापक स्तर पर कर्मियों द्वारा किया जा रहा आंदोलन।

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नयी दिल्ली: राज्य कर्मचारी पुरानी पेंशनबहाली को लेकर कई सालो से संघर्ष कर रहे हैं, सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन अब जंतर मंतर तक पहुुंच गया है। बताते चलें कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त हुए कर्मचारी, शिक्षक एवं अधिकारियों को नई अंशदायी पेंशन योजना का लाभ मिल रहा हैं ,जो कि कर्मचारियों के हित में नहीं है। नेशनल मूवमेंट फाॅर ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने के लिए कुछ दिन पहले ही रैली निकाली गई जहाॅ एनपीएस(नेशनल पेंशन स्कीम) से प्रभावित कर्मियों ने इसमें भाग लिया। वही उन्होंने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुये कहा कि अगर उनकी माँग को पूरा नहीं किया गया तो वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्र व्यापी आंदोलन करेंगे।

नयी पेंशन योजना से कर्मी बेहद नाखुश

कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन और नए पेंशन में बहुत ही अंतर है। नये पेंशन में सरकार जहां कर्मचारियों को खिलौने थमा रही हैं। वही पुराने पेंशन योजना में सारे स्कीम मिल जाते थे। मालूम हो कि इस रैली के माध्यम से सरकार को सचेत किया जा रहा है कि समय रहते हमारी पुरानी पेंशन लागू की जाए। बताते चलें कि नेशनल पेंशन स्कीम के बाद लोग पुरानी पेंशन स्कीम बहाली की माँग मुख्य रूप से इसलिए कर रहे हैं कि पुरानी स्कीम में कर्मियो का कोई योगदान नहीं है और तय पेंशन की गारंटी भी हैं।

1 कमेंट

  1. नबबिहारपत्रिका आपका बहुत बहुत धन्यवाद।आपने पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे जो आज पत्रिका में लिखे है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद
    ऐसे तो मैं आपसे बेहतर नही लिख पाऊंगा।लेकिन कोशिश जरूर करूँगा।पुरानी पेंशन और नई पेंशन में अंतर क्या है।अंतर तो आपने साफ साफ लिखा है।नई पेंशन नीति में कर्मचारियों के सामाजिक आर्थिक सुरक्षा की कोई गारन्टी नही है।रही बात पुरानी पेंशन में देश के कर्मचारियों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा की गारेंटी है
    पुरानी पेंशन योजना1972(19)1 संविधान के तहत दी गयी वो योजना है।जिसे सुप्रीम कोर्ट की बेंच1982 में D S नकारा की बेंच ने परिभाषित किया है।रही बात देश का कर्मचारी पुनः पुरानी पेंशन बहाली की माँग क्यो कर रहा है।पुरानी पेंशन देश के कर्मचारियों को 1972
    में लागू हुई थी।और यही पुरानी पेंशन देश के राजनीतिक को 1976 में लागू हुई जिसका संविधान में कही भी उल्लेख नही किया गया।जिसका उल्लेख संविधान में है।उनका पेंशन बदल दिया गया।जिनका संविधान में जिक्र भी नही है।उन्हें वही पुरानी पेंशन बहाल है।और देश का कर्मचारी काम करे।जनता का सरकार का और पेंशन ले।किसी और प्राइवेट कंपनी से
    देश का कर्मचारी साफ साफ NPS का विरोध इसलिए भी कर रहा।क्योंकि सरकार देश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन और नई पेंशन में बाट दिया है।एक सरकार
    एक कर्मचारी एक पेंशन की नीति खत्म कर दिया।कर्मचारियों को बाट दिया है।देश के जल थल वायुसेना को वही पुरानी पेंशन बहाल है।लेकिन देश के CRPF
    BSF RPF सैनिको को पेंशन के नाम पर सैनिक अर्धसैनिक के नाम से बाट दिया है।2003 तक भर्ती होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल है
    01/01/2004से सरकारी भर्ती में आये हुए कर्मचारियों को नई पेंशन लागू है।यहाँ भी कर्मचारी को पेंशन नीति से बाट दिया है।देश के सांसदों को तीन तीन पुरानी पेंशन बहाल है।और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के नाम पर वित्तीय बोझ बता देना।ये देश के कर्मचारियों
    के साथ नाइंसाफी है।जहाँ पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों के देहांत होने के बाद उनकी पत्नी को भी पेंशन मिलता था।या आश्रित को भी मिलता था।नई पेंशन व्यवस्था में ऐसा कुछ भी प्रवधान नही है।पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों के अंतिम वेतन का 50%,पेंशन के रूप में मिलता था और महंगाई भत्ता भी हर 6 महीने में जुड़ता था।किन्तु नई पेंशन में ऐसा कोई प्रावधान नही है।पुरानी पेंशन पाने के लिए कर्मचारियों को 10 साल की सेवा देने के बाद लागू थी।लेकिन नई पेंशन में ऐसा कोई प्रावधान नही है।पुरानी पेंशन देश के कर्मचारियों के सामाजिक आर्थिक सुरक्षा थी।किन्तु नई पेंशन योजना में देश के कर्मचारियों का शोषण ।और उद्योगपतियों के भरण पोषण सिर्फ छुपा है।
    आप का बहुत बहुत धन्यवाद मेरे पास जो जानकारी थी वो सब आपको दिया।अगर आपको लगता है।हमारे मांग सही है।या और कुछ जानकारी चाहते है तो अपना सबाल कर सकते है।आपको देश की कर्मचारियों की आवाज़ बनने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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