बच्चो की नर्सरी, यू.के.जी की पढ़ाई से सस्ती है कॉलेजों की पढ़ाई, मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन करेगी आंदोलन-कौशल क्रांतिकारी

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आज के अंग्रेजीनुमा स्कूलों में नन्हें बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों के लिए सहज नहीं रह गया है ..!!मिथिला स्टूडेंट यूनियन के प्रदेश कार्यकरिणी सदस्य श्री क्रांतिकारी का कहना हैं कि निजी स्कूलों में शरुआती कक्षा की पढ़ाई से कॉलेज में m.a. b.a. pg. की पढ़ाई सस्ती है ..!!

गांव ,टोले ,मोहल्ले ,वार्ड में रहने वाले रसूखदार घराने के बच्चे को इस तरह के स्कूलों में पढ़ते देख,गरीब और मध्यमवर्गीय लोग भी अपने बच्चे का दाखिला तो किसी तरह इस तरह के स्कूलों में दिला देते हैं, पर जब शुल्क जमा करने की बारी आती है तब पसीना उतरने लगता है ..!!

ऐसे स्कूलों में ना तो शुल्क पर कोई नियंत्रण है और ना ही सरकार का कोई कानूनी यहां चलता है अगर बच्चों को यहां पर आना है तो उनके नियम कायदे मानने होंगे और मनमाना रुपया भरना होगा …श्री क्रांतिकारी ने बताया कि किसी कॉलेज से एमबीए की पढ़ाई के लिए री -एडमिशन का कोई चक्कर नहीं रहता ,कॉलेज फीस भी लगभग समान रूप से लिए जाते हैं ..अमूमन उतना खर्च नहीं होता जितना बच्चों की सुरुआती शिक्षा की पढ़ाई में लगता है, यहां स्कूलों में पहले टेस्ट का प्रावधान होता है ..!!

टेस्ट में आ गए तो रजिस्ट्रेशन का शुल्क भरिए, रजिस्ट्रेशन के बाद ऐडमिशन, और इसके साथ ड्रेस किताब और अन्य स्टेशनरी समान देने पड़ते हैं, परीक्षा पास कर अगली कक्षा में जाए तो उसी स्कूल में री-एडमिशन कराइए..!! हर कक्षा के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है अगर आपका बच्चा एलकेजी में है तो उस पर डेड से 2लाख का व्यव करने होंगे कहीं कही तो इससे भी अधिक देना पड़ता है..!!

👉बजट बैलेंस करना हो जाता हैं मुश्किल..!!

सुरुआति शिक्षा की पढ़ाई के लिए निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिय खर्च इतने अधिक बढ़ जाते हैं कि मध्यमवर्गीय परिवारों में बजट बैलेंस करना मुश्किल हो जाता है ..!!अपनी साधारण आए से एक बच्चे के लिए डेड से 2 लाख निकालना अभिभावकों के लिए किसी संकट से कम नहीं है

अगर एक से अधिक बच्चों की पढ़ाई करनी है तो समझीए आफद ही आफ़द हैं ..!!

विडंबना यह है कि कमोबेश हर साल स्कूल में वृद्धि होती है ऐसे में उन्हें घर के बजट में कटौती करनी पड़ती है पर समस्या यह है कि कहां-कहां कटौती करें अगर देखा जाए तो अलग अलग स्कूलों के रेट भी अलग अलग है स्कूल में कहीं भी एकरूपता नहीं है और यह भी परेशानी की वजह है..!!

यह बात सच है कि निजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाना काफी महंगा साबित हो रहा है कि बच्चों के भविष्य का सवाल है इसलिए कुछ लोग बोल नहीं पाते पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की कॉलेज की पढ़ाई बच्चों की शुरूआती शिक्षा की पढ़ाई से सस्ती है…इस तरह शिक्षा में बढ़े मंहगाई ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार की कमर तोड़कर रख दी गई हैं,अगर भारत मे कहि भरस्टाचार हैं तो वह सबसे ज्यादा शिक्षा क्षेत्र में हैं ..!!


👉मिथिला स्टूडेंट यूनियन करेगी आंदोलन..!!

अगर सरकार इस पर कार्यवाई नही करती हैं तो मिथिला स्टूडेंट यूनियन इस तरह के दुर्भाग्यपूर्ण मनमानी तरीके से प्राइवेट संस्थानों के खिलाप आंदोलन करने पर विवस होगी..!!

👉प्राइवेट संस्थानों के मुख्य द्वार पर दम तोड़ रही हैं कानून…व्यवस्था !!

निजी स्कूलों में गरीबी और मध्यमवर्गीय बच्चों की पढ़ाई को शूलभ करने के लिए कुछ साल पूर्व सरकार की ओर से कानून आए थे जिसमें कई प्रावधान किए गए थे सरकार का यह निर्देश था कि (करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 )लागू करना होगा और निजी स्कूलों को पहले साल पहली कक्षा में 25 फ़ीसदी में कहा गया था कि आठवीं तक यह आरक्षण जारी रखना होगा..!!

निर्देश में छात्रों के एडमिशन की चयन प्रक्रिया किया गया था मगर आज इसकी अनुपालन का सच जांच के दायरे में है..!!

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