सुपौल के लोगों ने मन बना लिया, रेल नहीं तो वोट नहीं ! ललित ग्राम स्टेशन पर 11 सालों से रेल का इंतजार

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कोशी के इलाके में लोग लंबे समय से रेल का इंतजार कर रहे है। सहरसा फारबिसगंज आमान परिवर्तन कार्य पिछले सात वर्षों से चल रहा है सिर्फ 16 किमी तक रेल लाइन बिछाकर ट्रेन चलाने के लिए ट्रायल हो पाया है। 20 जनवरी 2012 को राघोपुर से फारबिसगंज के बीच पहले चरण के लिए मेगा ब्लॉक लिया गया था। लोगो को उम्मीद जगी थी की अब बड़ी लाइन की ट्रेन पर चढ़ने का सपना जल्द साकार होगा लेकिन आज भी लोग रेल के इंतजार में उम्मीद लगाए बैठे है। कई बार लोगो ने आंदोलन कर काम में तेजी लाने और ट्रेन चलाने की मांग की। सुपौल के लोगो का गुस्सा अब फुट पड़ा है। लोगो का कहना है की रेल नहीं तो वोट नहीं।

11 सालों से ललित ग्राम स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे है लोग

बड़ी संख्या में सुपौल जिलें के ललित ग्राम स्टेशन पर लोगो ने सड़क पर उतरकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ललित ग्राम पूर्व केंद्रीय रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र का पैतृक गांव है। विरोध कर रहे लोगो ने कहा की चुनावों से पहले अगर रेल नहीं चली तो ये लोग पूरे गांव गांव घूमकर लोगो को वोट न देने की अपील करेंगे।लोगो ने कहा कि पहले रेल फिर वोट, लोगो ने साफ कहा की रेल नहीं चलने पर वोट का बहिष्कार किया जाएगा। कुशहा त्रासदी के बाद ललित ग्राम स्टेशन पर रेल सुविधा पूरी तरह ठप हो गई। रेल के चलने से यहां के बाजारों में रौनक थी जो पिछले 11 सालो से रेल नहीं चलने की बजह से खत्म हो गई।

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