अटल जिसने अटल रह परमाणु परीक्षण के बाद महाशक्ति अमेरिका को भी झुका दिया घुटनों पर

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पटना: अटल बिहारी बस एक नाम ही नहीं, एक युग और एक सोच भी थी। निर्मल मन, कोमल स्वभाव और दिल से कवि अपने नाम के तरह अपने इरादों के भी अटल थे। लोकप्रिय और सर्वमान्य नेताओ में अटल जी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता हैं, जिनका आदर पक्ष ही नहीं विपक्ष भी करता था। नेताओं से ले पत्रकार मे सिर्फ अटल के बाद जी लगा के उनका संबोधन होता था, जो उनके ओजस्वी कद को झलकाता हैं।

पोखरण मे परमाणु परीक्षण कर देश को बनाया महाशक्ति

11 और 13 मई, 1998 के दिन भारत ने वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री रहते, राजस्थान के पोखरण में पांच परमाणु परीक्षण किए थे। इन परीक्षणों को इतने गोपनीय ढ़ग से किया गया की पूरी दुनिया को परीक्षणों की भनक तक नहीं लग सकी। पहले चरण में पोखरण मे जहां 11 मई को तीन परमाणु परीक्षण किये गये, तो ठीक दो दिन बाद दो और परीक्षण को अंजाम दिया गया। इन परमाणु परीक्षण के बाद जहाँ भारत को छठी महाशक्ति का खिताब मिल चुका था, वहीं कई देश इसके खिलाफ लामबंद हो एक होने लगें थे। अमेरिका के शह और उकसावे पर भारत पर ना जाने कितने प्रतिबंध लगाये गये। पर जिस देश का प्रधान ही इतना अटल हो, उसका यह प्रतिबंध क्या बिगाड़ सकते थे।

प्रतिबंध लगने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने की अटल सरकार में भारत की पांच दिन का सरकारी दौरा

N366339 04: U.S. President Bill Clinton, center, and Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee wave from Hydrabad House in New Delhi, India, March 21, 2000. President Clinton, in an extremely strong statement, condemned the massacre of 36 Sikhs by Kashmiri militants in Kashmir March 20, 2000. (Photo by T.C. Malhotra)

भारत के खिलाफ प्रतिबंध का अगवा रहा अमेरिका की पाकिस्तान से निकटता उस समय जग जाहिर थी। यह अटल की अटलता का ही जादू था, जिस ने उसी अमेरिका को अपने घुटनों पर झुका दिया। भारत ने परमाणु परीक्षणों पर विश्व को यह समक्षाने में कामयाबी पायी, की यह परीक्षण किसी पर हमले को नहीं बल्कि खुद की सुरक्षा के लिए है। बदलते वक्त के साथ अमेरिका ने भी यह समक्ष लिया की भारत को लाखों प्रतिबंध के बाद भी झुकाया नहीं जा सकता। इसके बाद जो हुआ वो इतिहास ही था, एक लबें दशक के बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पांच दिन के लिए भारत आया। यह राष्ट्रपति और कोई नहीं वही विलियम क्लिंटन थे, जिन्होंने भारत पर परमाणु परीक्षण के बाद प्रतिबंध लगाया था। 2000 मे भारत की इस यात्रा मे क्लिंटन जहाँ पांच दिन भारत रहे, वहीं अपने करीबी पाकिस्तान की यात्रा को पांच घंटे के कार्यक्रम में समेट दिया। इसे अटल सरकार की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी गई थी, जहाँ पहली बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति औपचारिकता निभा पाकिस्तान से दौरे पर आ वापस अमेरिका निकल गए हो।

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