नवरात्र के चौथे दिन करे मां कूष्मांडा देवी की पूजा । जाने महिमा,करे इन मंत्रों का जाप

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मां दुर्गा के नव रूपों में चौथा रूप है कूष्माण्डा देवी का दुर्गा पूजा के चौथे दिन देवी कूष्माण्डा जी की पूजा का विधान है । माँ कुष्मांडा का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं । देवी कूष्माण्डा अपनी मन्द मुस्कान से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है । इस दिन साधक का मन ‘अदाहत’ चक्र में अवस्थित होता है । अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए । कुष्मांडा देवी हाथों में सात तरह के शस्त्र धारण करती हैं और शेर के ऊपर रौद्र रूप में सवार रहती है ।

इन मंत्रों से करे देवी को उपासना ।

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तुमे।

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