नवरात्रि के छठे दिन करे मां कात्यायनी की पूजा, करे इन मंत्रों का जाप

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माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं । माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है । इनकी चार भुजाओं मैं अस्त्र शस्त्र और कमल का पुष्प है । इनका वाहन सिंह है । ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं । गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी । ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं । माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भास्वर है । इनकी चार भुजाएँ हैं। माताजी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है । बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है ।

मां कात्यायनी की करे पूजा ।

माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है । वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है ।

इन मंत्रों करे जाप ।

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ।

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