पांचवे दिन करे मां स्कंदमाता की पूजा , करे इन मंत्रो का जाप

0
307

आज नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा होती है। कहते है इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए, जिससे कि जीवन में हर लक्ष्य के तरफ आपका ध्यान वृत्ति एकाग्र हो सके । पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता । कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है । स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं जिनमें से माता ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है। उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है जिससे वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं तथा एक हाथ से उन्होंने गोद में बैठे अपने पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है। इनका वाहन सिंह है।

दुर्गा जी का ममता स्वरूप हैं मां स्कंदमाता

कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति मना जाता है तथा माता को अपने पुत्र स्कंद से अत्यधिक प्रेम है। जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है माता अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करती हैं।
स्कंदमाता को अपना नाम अपने पुत्र के साथ जोड़ना बहुत अच्छा लगता है। इसलिए इन्हें स्नेह और ममता की देवी माना जाता है।

इन मंत्रों से करे माता का जाप ।

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

पूजा में उपयोगी खाद्य साम्रगी

पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here