नवरात्र के तीसरे दिन करे मां चंद्रघंटा की पूजा, करे वैदिक मंत्रो का जाप

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माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति है “चंद्रघंटा”। माँ चंद्रघंटा के मस्तक में घंटा के आकार का अर्धचन्द्र हैं,इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा हैंं । माँ चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है । मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है । उनका वाहन सिंह है,उनके दस हाथ हैं । हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र हैं । वे आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं । मां चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है, वैभव की प्राप्ति होती है ।

वैदिक मंत्रों के साथ मां चंद्रघंटा की पूजा करे ।

तीसरे दिन वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा की पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।

इन मंत्रों का करे जाप

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

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