मुज़फ़्फ़रपुर कांड: सीक्रेट कोड वर्ड में होती थी बात, इलाज के नाम पर ले जाया जाता था यहाँ।

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मुजफ्फरपुर: बालिका गृह कांड मे रोज नये-नये खुलासे हो रहे हैं, जिसके बाद मुख्य आरोपी और बालिका गृह का संरक्षक ब्रजेश ठाकुर के कारनामों की सूची लंबी-चौड़ी होती जा रही है। रेगुलर स्वास्थ्य जांच के लिए लडकिया सरकारी अस्पताल में नही ले जाया जाता था। उनका इलाज निजी स्तर पर ही कर दिया जाता था। इसके बाद इलाज के नाम पर वहां से निकाल लड़कियों के साथ घिनौनी हरकत की जाती।

बच्चियों ने आने एक बयान में कहा है कि अस्पताल का नाम आते ही उन्ही रूह कांप जाती थी। क्योंकि उनको पता होता था अस्पताल ले नाम पर निजी स्तर पे इलाज कर उन्हें कही और भेजा जाएगा,जहाँ उनके साथ गलत कार्य किया जाएगा।

बालिका गृह से जुड़े लोगों के लिए “अस्पताल” इस सब का एक कोड वर्ड था।

वही सिविल सर्जन डॉ. शिवचंद्र भगत ने अपने स्तर से शनिवार को जांच की तो इन बातो का सच सामने आया,उन्हीने कहा बच्चीयों को इजाज के लिए लाभ सरकारी अस्पताल लाया ही नही गया।

स्वधार से 11 महिलायें भी है

ताजा मामला स्वधार का सामने आया है, जहां से 11 महिलाएं लापता हैं। इसे लेकर मुजफ्फरपुर के महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, इस संस्था का संरक्षक भी ब्रजेश ठाकुर है। यह संस्था संकल्प एवं विकास समिति के तहत चलती थी। इसके अलावा भी ब्रजेश ठाकुर की कई संस्थाओं के बारे में पता चला है जिसमें बालिका गृह जैसी ही गड़बड़ियों की आशंका है।

बालिका गृह के अलावा अल्पावास गृह, वृद्धाश्रम आदर्श महिला केंद्र, स्वधार गृह, लक्षित हस्तक्षेप परियोजना, आदर्श महिला शिल्प कला केंद्र, लिंक वर्कर स्कीम, भिक्षुक गृह और वामा शक्ति वाहिनी जिसकी कर्ताधर्ता ब्रजेश ठाकुर की नजदीकी मधु बतायी गई है।

मधु कुमारी मामला सामने आने के बाद से ही फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। हैरान करने वाली बात है कि भिक्षुक गृह ब्रजेश ठाकुर को तब चलाने के लिए मिला जिस दिन बालिका गृह कांड की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। हालांकि बाद में इसे खारिज कर दिया गया था। ये सभी संस्थाएं ब्रजेश ठाकुर और उसकी सहयोगी मधुकुमारी की देखरेख में सेवा संकल्प एवं विकास समिति के तहत चली थी।

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