चार साल का हुआ‌ एमएसयू , मिथिला के सम्पूर्ण विकास को लेकर हुआ था मिथिला स्टूडेंट यूनियन का गठन,जाने क्या है इनकी मांगे

0
394

मिथिला स्टूडेंट यूनियन कैसे धीरे धीरे वक्त के साथ अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हुआ। ऐसा क्या है जो नौजवानों की टोली मिथिला के विकास को लेकर सड़क से लेकर सदन तक अपनी बातों को पहुंचाने में कामयाब रही। चार साल पहले मिथिला स्टूडेंट यूनियन का गठन हुआ जिसका मूल उद्देश्य मिथिला का संपूर्ण विकास है। मिथिला के बंद हो चुके उद्योग धंधे, पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ और कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का काम किया है। कई बार इनकी मांगे आंदोलन का रूप ले चुकी है जिसका खामियाजा भी इन्हे पुलिस के डंडे हो या गिरफ्तारी कर चुकाना पड़ा है। इनकी मांग है की सरकार मिथिला विकास बोर्ड का गठन करे और इनकी मंगो को पूरा करे।

मिथिला स्टूडेंट यूनियन की प्रमुख मांगे

भागलपुर में सिल्क उद्योग के लिए।

*सीतामढ़ी में जानकी यूनिवर्सिटी आ बेगुसराय में दिनकर यूनिवर्सिटी के स्थापना के लिए।

* दरभंगा-पूर्णिया-भागलपुर-मुजफ्फरपुर सहरसा को हवाई यात्रा सुविधा से जोड़ना होगा..

* मिथिला में सहरसा एम्स ,आईआईटी, आईआईएम, आईटी एंड टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना, टेक्सटाइल पार्क की स्थापना …

* मिथिला में बंद पड़े चीनी मील-सूत मील-जुट मील-खाद मील-पेपर मील-खादी मील-सिल्क मील आदि उद्योग के रिवाइवल के लिए।

* समस्तीपुर, मुंगेर, सीतामढ़ी में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए। उपलब्ध मेडिकल कॉलेजों एवम अस्पतालों के स्थिति में सुधार के लिए।

* सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों, स्पेशल एजुकेशन जोन की स्थापना के लिए। उपलब्ध यूनिवर्सिटीज के हालत में सुधार के लिए। ताकि हमारे क्षेत्र के छात्र को कहि और जाकर लाखो रुपया बर्बाद ना करना पड़े…

* खेती-किसानी को उन्नत बनाने के लिए। स्टेट बोरिंग, कोल्ड स्टोरेज, बेहतर सिंचाई-खाद-बीज-वैज्ञानिक पद्धति-उपकरणों की उपलब्धता के लिए। पशुपालन-मत्स्य पालन, मखाना उद्योग-लीची प्रसंस्करण उद्योग, कुक्कुट पालन, कृषि आधारित उद्योग और क्लस्टर बेस्ड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए।

* बेहतर रेलवे और रोड परिवहन सुविधा के लिए। कोशी, गंगा और अन्य नदीय क्षेत्रों में पुलों के ज्यादा निर्माण कर बेहतर कनेक्टिविटी के लिए।

* टूरिज्म-कल्चर-भाषा संवर्धन हेतु बेहतर बजट। मैथिली को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता। मैथिली को प्राथमिक शिक्षा में शामिल करने के लिए। मिथिलाक्षर-मैथिली रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की स्थापना के लिए।

* क्षेत्र में कॉपरेटिव समूहों, महिला सहकारी समितियों के द्वारा गृह-कुटीर उद्योगों में बढ़ावा के लिए।

* बाढ़ और सुखाड़ के स्थायी निदान के लिए। सभी जिले में बंद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित उप स्वास्थ्य केंद्र को सुचारु रुप से खोलें ।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here