‘बाबा मट्टेश्वरधाम’ में सावन के पहले सोमवार की तैयारी पूरी । जानिए इस अविश्वनीय शिवलिंग के बारे में ।

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2020

सहरसा बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल स्थित कांठो पंचायत में ‘बाबा मट्टेश्वरधाम’ एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहा सावन और भादो के महीने में भक्तों की अपार भीड़ जुटती है। यही कारण है इस मंदिर बाबा मट्टेश्वर धाम को ‘मिनी बाबा धाम’ के नाम से जाना जाता है। भगवान भोलेनाथ का यह प्राचीन मंदिर यहां आसपास के कई जिलों और कस्बों में काफी लोकप्रिय है। भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का जत्था दूर दूर से इस मंदिर में आता है।

मुंगेर से जल लेकर बाबा का अभिषेक करने आते है श्रद्धालु

सावन व भादो महीन में झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम की तरह यहां भी अत्यधिक भीड़ उमड़ती है । 80 किमी पैदल चल मुंगेर के छद्दा पट्टी से गंगाजल भरकर कावड़ यात्रा कर बाबा मटेश्वर धाम में लाखो की संख्या में श्रद्धालु बाबा का जला अभिषेक करते हैं ।

अद्भुत है मटेश्वर धाम का शिवलिंग

बाबा मट्टेश्वर धाम के इस मंदिर में स्थपित शिवलिंग के चारों ओर सालों भर जल भरा रहता है। यहां के लोग बताते हैं की यह जल कितना गहरा है और कितनी मात्रा में है, यह मापने की कई कोशिशें हुई हैं लेकिन इसकी मापी आजतक हर प्रयास विफल रहा। लोगों के अनुसार हर साल यहां के शिवलिंग का आकार बढ़ता जा रहा है। शिवलिंग के चारो तरफ से एक इंच खाली स्थान है,जहाँ से गर्मी के मौसम में पानी ऊपर आने लगता है, जबकि बरसात में पानी का जलस्तर नीचे चला जाता है।

अविश्वनीय रूप है शिवलिंग का

यह शिवलिंग स्वयं अंकुरित हुआ है। 14वी सताब्दी का यह शिवलिंग जमीन से 30 से 40 फुट ऊंचे टीले पर स्थापित है। काले रंग के शिवलिंग की लंबाई 4 फीट तथा उचाई ढाई फीट है। 2003 में जब शंकराचार्य वाशुदेवानंद ने जब इस शिवलिंग के दर्शन किए तो उन्होंने कहा यह अनोखा शिवलिंग उन्होंने पहली बार देखा है, यह दुनिया का अनोखा शिवलिंग है ।

शिवलिंग की खोज

गांव वालो का कहना है कि करीब 100 साल पहले बघवा गांव के सत्यदेव राय के स्वपन में खुद भगवान महादेव आए थे। उसके बाद उन्होंने उस जगह पर मंदिर का निर्माण कराया। उस समय जब मंदिर निर्माण हेतु खुदाई की गई तो पुरानी मूर्तियां, पत्थर और अन्य सामान मिले थे ।

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