मिथिला की नई पहचान मैथिली ठाकुर।

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सहरसा/दरभंगा(मृतुन्जय)। बिहार की पहचान बन चुकी मैथिली ठाकुर आज मिथिला की शान बन चुकी है। संगीत के क्षैत्र में अपनी अलग पहचान बनाकर मिथिला को एक अलग पहचान दिलाई है।
मैथिली ठाकुर 17 साल की हैं। लेकिन संगीत की हर विधा में निपुण। क्लासिकल से लेकर बॉलीवुड के फास्ट ट्रैक तक सटीक सुर में गाती हैं। हारमोनियम पर भी उनकी अंगुलियां मंजे हुए कलाकार की तरह दौड़ती हैं। इन्हें टीवी रियलिटी शो राइजिंग स्टार-2017 से फेम मिला। वह फ़र्स्ट रनर-अप रहीं संगीत के क्षेत्र में अपनी मधुर आवाज से बहुत कम समय में अमिट छाप छोड़ने वाली मैथिली ठाकुर को संगीत विरासत में मिली है। बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी (उड़ेन) की रहने वाली मैथिली को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा अपने दादा बच्चा ठाकुर और पिता रमेश ठाकुर से मिली।

मैथिली बताती हैं कि घर में संगीत के परिवेश में पली-बढ़ी होने के कारण बचपन से ही उसका लगाव संगीत से रहा। मैथिली के दो भाई ऋषभ (14) और गुंजन (10) भी शास्त्रीय संगीत में निपुण हैं। शास्त्रीय संगीत को पसंद करने वाली मैथिली कहती हैं, “संगीत एक साधना है। संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं हो सकता”। मैथिली अब तक संगीत के क्षेत्र में कई विशिष्ट पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। वह राष्ट्रीय स्तर के गायन कार्यक्रम ‘इंडियन आइडल जूनियर-2015’ और ‘सारेगामापा’ सहित कई रियलिटी शो में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा चुकी हैं। आकाशवाणी ने मैथिली ठाकुर के शास्त्रीय संगीत को प्रसारित करने का 99 साल के लिए अनुबंध किया है, जिसकी रिकॉर्डिंग 10 जुलाई को की गयी। अब अगले 99 साल तक यह रिकॉर्डिंग बेगम अख्तर की तरह ही आकाशवाणी प्रसारित करेगी। इतनी कम उम्र के किसी भी गायिका से आकाशवाणी ने इस तरह का अनुबंध पहली बार किया है।

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