बिहार संपर्कक्रांति को मिथिला पेंटिंग से सजाने वाली महिलाओं का रेलवे के तरफ से पैसे नहीं मिलने का आरोप

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दरभंगा। जब 23 अगस्त को बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस मिथिला पेंटिग से सजी हुई निकली तो देश भर में रेलवे की तारीफ हुई और मिथिला पेंटिग की चमक ने देश भर के लोगो को अपनी ओर आकर्षित किया। बिहार संपर्क क्रांति के 24 कोचों को 45 मधुबनी आर्टिस्ट ने मिलकर मधुबनी पेंटिंग से सजाया था। सभी 45 महिलाओं ने बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस अपनी हुनर से इस तरह तराशा की दुनिया देखती रह गई।

अंजलि झा ने रेलवे के तरफ से पैसे न मिलने का आरोप लगाया।

20 वर्षीय अंजलि झा दरभंगा जिले के मिलवर की रहने वाली है , मिथिला पेंटिंग से उनके घर की रोजी रोटी चलती है। बिहार संपर्क क्रांति की पेंटिंग में इन्होंने महत्वपूर्व भूमिका निभाई, अंजलि ने कहा की मधुबनी पेंटिग से सजी ट्रेन को निकले 6 महीने हो गए लेकिन उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला। ट्रेन को 45 कलाकारों के समूह ने मिल कर सजाया है, जिसमे अंजलि झा ने 20 कोचों के स्केचेज करने का काम किया । अंजलि ने कहा की 3 महीने दरभंगा स्टेशन पर काम कर ट्रेनों को मिथिला पेंटिंग से सजाया। इनमे से ऐसे बहुत से कलाकार है जिनका गुजारा मिथिला पेंटिंग के बदौलत ही चलता है। ट्रेन को सजाने वाली बहुत से कलाकारों ने कहा की रेलवे की तरफ से दिसंबर तक पैसे मिलने थे लेकिन अभी तक नहीं मिला।

ठेकेदार ने कहा थोड़ी सी चूक से हो रही है देरी।

ट्रेनों को सजाने का ठेका लेने वाले आशुतोष साहू ने कहा की उनसे फॉर्म भरने के दौरान कुछ गलती हो गई थी जिस कारण पैसे मिलने में देरी हो रही है, ठेकेदार ने कहा 45 कलाकारों को ज्यादा पैसे देने है, अगर रेलवे के तरफ से पैसे जारी कर दिए जाते है तो प्रत्येक कलाकारों को 15 से 20 हजार रुपए मिलेंगे। ठेकेदार ने आश्वस्त होते हुए कहा की घबराने की जरूरत नहीं पैसे नहीं मिलने की स्थिति में वह भुगतान करेंगे।

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