सहरसा के कॉलेज गेट क्रिकेट ग्राउंड से मैक्सिको राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का सफर । जरूर पढ़े

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सहरसा: कॉलेज गेट मैदान से निकलकर जगनमोहन ने (दोस्त के बीच जग्गू के नाम से मशहूर) मैक्सिको राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का सफर तय किया है। स्कूल के दिनों में कॉलेज गेट के मैदान पर जब जग्गू अपनी बॉलिंग में कलाइयों को घूमता तो देखते ही देखते बल्लेबाज की गल्लिया उखड़ जाती थी ।

जगृत की कलम से (अमेरिका से भेजी गई मेल से)

बचपन में सबका एक ही सपना होता है बल्ला मिला तो क्रिकेटर ही बनना है। आम बच्चो की तरह सहरसा जैसे छोटे शहर में एक सपना लिए की क्रिकेट ही बनूंगा बड़ा होकर, लेकिन मॉ बाप के अरमान बेटे के लिए हमेशा अलग ही होते है। छोटे शहरों में क्रिकेट मे मुकाम बनाना आसान नहीं माना जाता, हमारे समाज में मां बाप का एक ही सपना होता है वो भी अपने बच्चों को डॉक्टर इंजिनियर बनने का। जगृत (जगमोहन का नया नाम) के घर से एक ही प्रेशर था की बस पढ़ाई करना है, लेकिन समय निकाल कर क्रिकेट भी खेल लेता था। स्कूल के दिनों में क्रिकेट से ज्यादा कोचिंग क्लासेस रहती थी, लेकिन जगृत स्कूल बंक करके क्रिकेट खेल लिया करता था जगृत को 10 वी के बाद सहरसा से बाहर जाना पड़ा पढ़ने के लिए, जहाँ उसने एडमिशन पटना साइंस कॉलेज में लिया। वहां भी कोचिंग और पढ़ाई के बीच बस एक रविवार का दिन होता जब क्रिकेट खेलने का मौका मिलता। पटना से निकल जगृत इंजीनियरिंग करने चेन्नई चला गया, जहा अन्ना यूनिवर्सिटी से इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट हुआ ।

कॉलेज से क्रिकेट का सफर ।

सही मायनों में जगृत की क्रिकेट की शुरूआत चेन्नई से हुई जहा कॉलेज में नेट्स और क्रिकेट खेलने के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध थी। कॉलेज में जगृत के कई सीनियर थे, जिनमें से एक सौम्य कुंदू उसके खेल को सही दिशा में ले जाने के लिए मोटिवेट किया। 2014 तक सब कुछ सही जा रहा था, जगृत ने कुछ ट्रायल्स में भाग लिया। सफलता और असफलता का साथ चलता रहा, जहाँ लह कभी सेलेक्ट कर लिया जाता तो किसी में रिजेक्ट। जगृत ने हर जगह हमेशा अपना बेस्ट दिया, हर सफलता और असफलता से उसे बहुत कुछ सीखने को मिला। 2 जून 2015 ये तारीख में जगृत कभु नहीं भूल सकता, जब मेरे घुटनों में फ्रैक्चर अा गया था। इस दौरान कोच प्रसाना रमन जो अभी साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम के एनलिस्ट है, उनसे इसे बहुत सीखने को मिला।

प्रासना रमन की मोटीवेशन

जागृत तुम्हार पास सिर्फ 15 साल है क्रिकेट के लिए ,अंजाम कुछ भी हो तुम्हे रिजल्ट की चिंता किए बिना अच्छा प्रदर्शन करतें रहना। जब 15 साल बाद पीछे मूड के देखो, तो ये ना कहना कि मैने कोशिश नहीं की। घुटनों में इंजरी के कारण जगृत का क्रिकेट खेलना मुश्किल था, डॉक्टर ने सर्जरी करने को कह रखा था। लेकिन जगृत इसके लिए तैयार नहीं था, क्यूंकि सर्जरी के बाद खेल के मैदान में पहले जैसी फुर्ती नहीं रह जाती। जगृत ने इसके बाद सबसे अच्छे फिजियो थेरेपिस्ट की मदद ली जो, की Spaarc के संस्थापक है। इन्होंने इनके घुटनों में जान डाल दी, जिसके बाद फिर से संघर्ष के कर वह खुद को क्रिकेट के मैदान में देख पा रहा था।

लाइफ की सबसे बड़ी टर्निंग प्वाइंट

सीटीसी क्लब के कैप्टन जय थे, उन्होंने उसे स्पिन बॉल डालने को कहा, उन्होंने जगृत के स्पिन में कुछ ऐसा देखा जो शायद जगृत अपने अंदर कभी देख नहीं पा रहा था। यहां से उसकी जिंदगी पटरी पर आने लगी और उसका सलेक्शन तमिलनाडु क्रिकेट प्रीमियर लीग में हो गया। जहा उसका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा, लेकिन क्रिकेट की टीम में मेरा सलेक्शन नहीं हो सका । उसके बाद 2016 में HCL technologies में काम करने के दौरान कुछ प्रोजेक्ट के सिलसिले में जगृत को अमेरिका मेक्सिको जाना पड़ा ।

मेक्सिको में क्रिकेट सफर

मेक्सिको में सबसे खूबसूरत शहर गुदालजरा जाने का मौका मिला जहां कोई क्रिकेट नहीं थी, कुछ भारतीय थे जो टेनिस की गेंद से क्रिकेट खेलते थे। जगृत को क्रिकेट से इतना ज्यादा लगाव था कि उसने एक प्रोफेशनल क्रिकेट लीग तैयार की जिसका नाम जीडीएल (GDL) था। यहां उसने लैदर की गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया, जिसके लिए में सुजीत, देव, गोपी, अभिलाषा और कुछ अन्य साथियों का हमेशा शुक्रिया अदा करता हैं।

राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चयन ।

इंटर स्टेट टूर्नामेंट में परफॉर्मेंस को देखते हुए राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने उसे मेक्सिको राष्ट्रीय टीम में चयन किया है। मेक्सिको राष्ट्रीय टीम कोलंबिया में 22 अगस्त से होने वाली साउथ अमेरिकन चैंपियनशिप में वह भाग लेगा, जहां में मेक्सिको की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगा।

5 कमेंट

  1. Behad garv ki baat hai ki hamare beech ka dost mexico mei aake cricket ki shuruat karke khud national team ke liye select ho gaya. Kadi lagan aur mehnat ka fal hamesha safalta deti hai ye inhone saabit kar diya. Bhot bhot dhanywad inko inki safalta pe.

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