शीघ्र चले महानगरों के लिए ट्रेन, रेलवे और जनप्रतिनिधि से कोसीवासियों को आस

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सहरसा(मृतुन्जय)। 12 जून 2005 को जब पहली बार सहरसा से इंटरसिटी चली तो लोगो के मन में ये उम्मीद जगी की देश के महानगरों के लिए ट्रेन चलेगी। लेकिन बड़ी रेल लाइन चालू होने के 18 साल बाद भी रेल पटना ,दिल्ली और अमृतसर से आगे नहीं बढ़ पाई। इस कारण कोसीवासियों को महानगर जाने के लिए पटना, बरौनी और समस्तीपुर स्टेशन जाना पड़ता है। रेल राजस्व के मामले में दरभंगा के बाद सहरसा का दूसरा स्थान आता है। लेकिन सहरसा से ट्रेन चलाई जाती है वह भी बिना आरक्षित बोगी वाली जिसमें यात्री भेड़ बकरियों की तरह लद कर सफर करने को मजबुर है। सहरसा के लोगो की मांग को रेलवे अनसुना कर दे रही है। सांसद महोदय की बातें आश्वासन तक ही सिमट कर रह गई है। सहरसा से नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन न चलाकर रेलवे को पुरबिया एक्सप्रेस और गरीब रथ को प्रति दिन कर देना चाहिए। सहरसा से धार्मिक स्थलों के लिए ट्रेन चलाने की जरूरत है जनहित का विस्तार अगर बनारस तक कर दिया जाएं तो कोशी से सीधे काशी के लोग जुड़ जाएंगे। सहरसा से उज्जैन,जम्मू कश्मीर, गुवाहाटी ,मुंबई,चेन्नई और बंगलुरू के लिए ट्रेन देने की जरुरत है,सहरसा से लम्बी दूरी की ट्रेन न होने से बिहार के बाहर आने जाने वाले लोगो की परेशानी को रेलवे समझती नहीं। रेलवे का कहना है कि सहरसा जं पर प्लेटफार्म निर्माण होने के बाद नई ट्रेनों का विस्तार संभव हो पाएगा। लेकिन प्लेटफार्म निर्माण में हो रही देरी से आम यात्रियों को ही परेशानी हो रही है। रेलवे निर्माण कर रहे संवेदकों पर कार्रवाई करने से बचती है। कटिहार डिविजन में केवल की कमी नहीं है ,लेकिन समस्तीपुर रेल मंडल में अभी तक केवल की पूर्ति नहीं हो रही है।

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