भारत का अनोखा द्वीप जहां जाकर मिलती है मौत !

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पृथ्वी एक अनोखा ग्रह है , जिसमे मानव का अस्तित्व पृथ्वी पर काफी पुराना है . मानव पृथ्वी के विभिन्न भू भाग पर बसते चले आये है , वर्तमान में मानव समाज ने इतना विकास किया है कि पृथ्वी के एक हिस्से का सम्पर्क दुसरे हिस्से से होने लगा है . लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पृथ्वी पर अभी भी ऐसे भू भाग है , जहाँ अभी भी बहुत ही प्राचीन जनजातियाँ रहती है तथा यह जनजाति वर्तमान की विकसित वैश्विक दुनिया से पूरी तरह कटी हुई है .

ऐसे बहुत से क्षेत्र है जिनका सीधा सम्पर्क किसी भी देश से नही है उन्ही में से एक ऐसी ही जगह की हम बात कर रहे है जिसका नाम है नार्थ सेंटिनल आईलैंड .

नार्थ सेंटिनल आईलैंड यह एक ऐसा द्वीपीय इलाका है जो भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी द्वीप अंडमान निकोबार से थोड़ी दूरी पर स्थित एक एक छोटा सा द्वीप है . यह द्वीप भारतीय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है . हाल ही में यह द्वीप पूरी दुनिया में अचानक ही चर्चा का विषय बना है , क्योंकि  इस द्वीप पर ऐसी घटना घटी है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है . जी हाँ इस द्वीप पर पिछले दिनों 17 नवम्बर को एक अमेरिकी नागरिक जॉन एलिन शाओ की हत्या इस द्वीप पर मोजूद जनजातियो लोगो ने कर दी थी .

जॉन एलिन शाओ एक इसाई धर्म प्रचारक थे जिनकी सोच थी कि वह इन लोगो से मित्रता करकर आधुनिक मानव से उनका संपर्क बना सकते है , साथ ही उन्हें धर्म का ज्ञान भी दे सकते है . जॉन एलिन शाओ पिछले कई सालो से इस इलाके में दिलचस्पी दिखा रहे थे ,इसलिए वह भारतीय सरकार से परमिशन लेकर तथा एक स्थानीय मछुआरे की मदद से सेंटिनल द्वीप पहुचे . लेकिन सेंटिनल जनजातीय लोगो को उनका इस तरह उनके इलाके में प्रवेश करना पसंद नही आया जिसका अंजाम यह हुआ कि जॉन एलिन शाओ को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा . भारत सरकार ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

दरअसल नार्थ सेंटिनल में रह रहे आदिवासियों का अस्तित्व 60,000 वर्ष पुराना है जिसके वंशज प्राचीन अफ्रीका से इस भारतीय द्वीपों में आकर बस गए थे . अंडमान निकोबार समूह के आसपास जितने भी द्वीप है वहाँ जारवा , ओंगे , ग्रेट अंडमानी , सेंटिनलिज , बो व् शम्फोस जैसी जनजातियाँ अलग अलग द्वीपों में बसी हुई है . नार्थ नार्थ सेंटिनल द्वीप में जो  जनजाति बसी हुई है उनको सेंटिनलिज जनजाति कहा जाता है , यह जनजाति बहुत ही प्राचीन समय से यहाँ पर है , इस जनजाति के लोगो का बर्ताव आक्रामक है . जिस कारण यह लोग किसी भी बाहरी व्यक्ति को अपने इलाको में प्रवेश नही करने देते साथ ही इस जनजाति के लोगो के शरीर का इम्यून सिस्टम बहुत ही कमजोर है इसलिए  बीमारी के लिहाज से इस जनजाति लोग बड़े संवेदनशील होते है क्योंकि कोई भी बाहरी  व्यक्ति इस क्षेत्र में आकार कई तरह के संक्रमण अपने साथ ला सकता है, इसलिए भी यह किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नही करने देते और जो भी इनके इलाके में आता है उन पर यह तीरों और भालो से हमला करते है  .

सेंटिनल जनजाति के लोगो की भाषा समझी नही जा सकती , यह लोग अपना जीवन यापन करने की लिए जंगली जानवरों का शिकार ,नारियल पानी व् फल आदि पर निर्भर है . इन लोगो की जनसँख्या 30 से 250 हो सकती है ऐसा अंदाजा भारत सरकार द्वारा लगाया गया है

समय समय पर इस इलाके की खोज करने के लिए कई लोगो ने इस सेंटिनल द्वीप पर जाने की कोशिश की है साथ ही उन्हें बाहरी दुनिया से जोड़ने की कोशिश की है, लेकिन जिन भी लोगो ने यह कोशिश की उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है . इसके आलावा भारत सरकार ने भी 2004 की सुनामी के बाद इस इलाके में भारतीय वायुसेना के हेलीकाप्टर भेजे जिसके बाद इन लोगो ने हेलीकाप्टर पर भी पत्थरो व् तीरों से गिराने की कोशिश की जिससे ये जाहिर हुआ कि ये लोग अपने क्षेत्र में किसी का भी आना पसंद नही करते . इसीलिए भारत सरकार ने इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्रो की श्रेणी में रखा है साथ ही इस इलाके में जाना प्रतिबंधित कर रखा है ताकि इन जनजातीय लोगो की संस्कृति बची रहे .

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