बिहार लिखेगा फिर से इतिहास, बनेगा देश का सबसे लंबा पुल- जल्द होगा कार्य प्रारंभ

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पटना। भारत माला श्रृंखला के तहत केंद्र सरकार ने कई प्रमुख तीर्थ स्थलों को आपस में जोड़ने की योजना बनाई है। इसके तहत नितिन गडकरी ने सहरसा के महिषी में स्थित शक्तिपीठ मां तारा स्थान से मधुबनी स्थित शक्तिपीठ उच्चैठ दुर्गा स्थान को जोड़ने की घोषणा की थी। इस मार्ग के लिए मिथिलांचल स्थित कोशी नदी पर देश का सबसे लंबा पुल का डीपीआर तैयार कर लिया गया हैं। मधुबनी के भेजा से सुपौल के परसरमा के बीच बनने वाली 10.2 किमी लंबी पुल का डीपीआर तैयार कर एनएचअआई ने केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, इसके साथ पुल का काम शुरू कर दिये जाने की संभावना जताई जा रही हैं।

1286 करोड़ की लागत से तैयार होगा देश का सबसे लंबा पुल।

कोशी नदी पर बनने वाले पुल की लंबाई 10.2 किलोमीटर होगी। पुल की चौड़ाई 16 मीटर होगा, साथ में पुल के दोनों छोर फुटपाथ से लैस होगा। पुल के लिए करीब 170 पायों का निर्माण किया जाएगा, जहां पायों की दूरी एक दूसरे से 60 मीटर की होगी। इसके लिए करीब 40 मीटर का फाउंडेशन पायों के लिए तैयार किया जाएगा। जमीन अधिग्रहण सहित पुल बनाने में कुल 1286 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

पुल बनने से दो राष्ट्रीय राजमार्ग एक दूसरे से जुड़ जाएंगे।

पुल बनने से मधुबनी स्थित एनएच 527 ए, सुपौल के एनएच 327 ए को जोड़ेगी। मधुबनी जिले के उच्चैठ भगवती स्थान, बासोपट्टी, बेनीपट्टी, रहिका, मधुबनी, रामपट्टी, अवाम, लोफा, भेजा, बकोर, कोशी घाट होते हुए सुपौल के परसरमा से जुड़ेगी। सुपौल के परसरमा होते हुए सहरसा स्थित एनएच 107 के महिषी, तारास्थान, बनगांव, बरियाही होते हुए सहरसा बाज़ार में यह मिलेगी। कुल सड़क की लंबाई 160 किमी की होगी और सड़क की चौड़ाई 10 मीटर होगी। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है।

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