इस रेलवे लाइन ने की दिल्ली की दूरी 100 किलोमीटर कम, रेल लाइन चालू होने के महीनों बाद भी रेलवे का इस रास्ते हो सहरसा- सुपौल- दरभंगा से दिल्ली तक ट्रेन चलाने से इनकार।

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दरभंगा: चार साल के लबें इंतजार के बाद आखिर 24 जुलाई को वो दिन आ ही गया, जिसका पूरे मिथिला को इंतजार था। इसी दिन दरभंगा-नरकटियागंज रेल लाइन के आखरी खंड को बड़ी लाईन में बदलने का काम पूरा कर लिया गया। नयी लाइन के खुलते ही लोगों मे आशा और खुशी की लहर देखते ही बनती थी, आखिरकार दरभंगा नरकटियागंज खंड का हिस्सा एक बार फिर बड़ी लाइन के साथ एक हुआ था। पर पाच महीने बाद भी दरभंगा हो कर आज तक दिल्ली और गोरखपुर तक सेवा शुरू ना होने से, रेलवे की मंशा पर सवाल उठाए जाने लगें हैं।

साजिश के तहत खंड खंड मे बटा गया दरभंगा-नरकटियागंज रेल खंड।

करोड़ों की लागत के खर्च से रेल खंड को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदलने का काम बजट मे घोषित किया गया था, जिसके तहत जयनगर-दरभंगा-सीतामढ़ी-रक्सौल-नरकटियागंज तक का आमान परिवर्तन किया जाना था। आमान परिवर्तन से पहले यह पूरा खंड दरभंगा-नरकटियागंज के नाम से जाना जाता था, पर अब इसे खंड खंड में बाट कर सिर्फ नरकटियागंज-रक्सौल के बीच सवारी गाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है। जिसके बाद इस रेल खंड को लेकर रेलवे की मंशा पर सवाल उठाए जाने लगें है, वहीं लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे है।

आज तक नहीं चली दरभंगा हो अजमेर तक ट्रेन

मालूम हो की सालों से इस रास्ते हो दरभंगा से अजमेर तक ट्रेन चलाने की रेलवे बजट में घोषणा की गई थी। साल दर साल अमान परिवर्तन के बाद इस ट्रेन के परिचालन की लोग आस लगाये बैठे रहे, पर आमान परिवर्तन के बाद भी आजतक इस ट्रेन को रेलवे द्वारा दौड़ाया नहीं जा सका। फिलहाल ट्रेनों की कमी और इस खंड की उपेक्षा से लोगों में रोष व्याप्त है।

लंबा रहा है अमान परिवर्तन का इतिहास

1998 मे शुरू हुआ आमान परिवर्तन कार्य के तहत पहले चरण के तहत दरभंगा-जयनगर को बड़ी लाइन में बदला गया। दूसरे चरण मे दरभंगा-सीतामढ़ी, तीसरे चरण में सीतामढ़ी-छोड़ादानो को बड़ी लाइन में बदला गयीं। वहीं आखिरी दो चरणों में छोड़ादानो-रक्सौल और रक्सौल-नरकटियागंज को बड़ी लाइन में तब्दील किया गया।

40 किलोमीटर आमान परिवर्तन में लगें रेलवे को चार साल

रेलवे द्वारा नरकटियागंज- रक्सौल को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदलने के लिए 2014 मे मेंगा ब्लॉक लिया गया था। 2 साल बाद 2016 में इस खंड पर 28 महीने के मेंगा ब्लॉक के बाद पहली बार ट्रायल इंजन का परिचालन किया गया था। हालांकि ट्रेनो का परिचालन फिर भी नहीं हो सका, इसके पीछे प्लेटफार्म और स्टेशन पर सिविल वर्क का काम पूरा ना हो पाने की वजह बताई गयी हैं। बाद में रेलवे ने बाढ़ का बहाना बना परिचालन को टाल दिया। बाढ़ के बाद रेलवे सिंगनल के लिए केबल ना होने का बहाना ले कर आयी। बहानो का दौड़ चलता रहा और दो साल का समय और निकल गया।

रेल खंड निर्माण मे हुआ करोड़ों का खेल, लाखों यात्रियों की जान खतरे मे डाल हुए घटिया पुल तैयार

पिछले साल हल्के बाढ़ में बैंरगनिया स्टेशन के पास नव निर्मित पुल बह गया था। नवंबर-दिसंबर में इस पुल की जांच शुरू हुई और भ्रष्टाचार की परत खुलने लगी। पूरे रेल खंड पर निम्नस्तर के घटिया पुलों को तैयार किया गया। पुल इतने घटिया थे की वो परिचालन का भाड़ संभाल ही नही सकते थे। पुलों पर से ट्रेन के गुजरते ही लाखों यात्रियों के साथ अनहोनी हो सकती थी। बैरगनिया रेल पुल बहने के बाद शुरू हुई जांच से तीनों पुल ढहाने पड़े। नये पुलो का सीसीटीवी के जरिए सीधे रेलवे बोर्ड की निगरानी में पुननिर्माण हुआ हैं। पूरे मामले में एक डिप्टी चीफ इंजीनियर सहित पूर्व मध्य रेलवे के तीन इंजीनियरों पर चार्जशीट की गई है।

दरभंगा दिल्ली की दूरी होगी कम

मालूम हो इस रेल लाइन द्वारा दरभंगा-गोरखपुर सीधे जुड़ गयें हैं। साथ ही दिल्ली की दूरी भी दरभंगा से अब कम हो चुकी हैं,सबसे खास बात यह है की दिल्ली और गोरखपुर जाने को समस्तीपुर मे तरह लोको रिवर्सल का समय भी नहीं लगेगा। कोशी महासेतु होकर सहरसा से दिल्ली के लिए जब ट्रेन चलेगी तो दिल्ली जाना आसान होगा।

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