बिहार के इस जगह से हुई थी होली की शुरुवात, यहीं खंभा फाड़कर प्रकट हुए थे भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार , आज भी 1411 इंच लम्बा प्रहलाद खंभ मौजूद

0
8760

बिहार प्राचीन काल से ही देव भूमि रही है, यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जहां जरूर जाना चाहिए। होली का त्योहार पूरे देश में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है लेकिन क्या आपको पता है की इसकी शुरुवात कहा से हुई। मान्यता है कि राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भगवान विष्णु भक्त पुत्र प्रहलाद को कई बार मारने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाया, राजा की बहन होलिका को आग में नहीं जलने का वरदान प्राप्त था, होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाकर अग्नि में प्रवेश की की जिसके बाद होलिका जल कर राख हो गई और प्रहलाद को कुछ नहीं हो पाया। होलिका के मरने के बाद लोगो द्वारा होली मनाई गई तब से लोग होली का त्योहार मनाने लगे। इसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का बध किया था। मान्यताओं के अनुसार होली की शुरुवात पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडल के धरहरा प्रखंड से हुईं थी, यही से होलिका दहन की शुरुवात हुई थी। यहां प्रतिवर्ष सरकारी स्तर पर होलिका दहन का कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

बनमनखी के धरहरा प्रखंड में ही भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था।

मान्यता है की बनमनखी स्थित धरहरा में ही खंबा फाड़कर भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का बध किया, जिसके बाद से होलिका दहन की शुरुवात हुई।

धरहरा की धरती पर आज भी भगवान नरसिंह अवतार के साक्ष्य मौजूद।

पूर्णिया जिले के बनमनखी के धरहरा में भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के आज भी साक्ष्य मौजूद है। एनएच 107 के किनारे धरहरा स्थिति सिकलीगढ़ में नरसिंह अवतार स्थल मौजूद है, यहां एक खंबा एक निश्चित कोन पर झुका हुआ है जिसकी लंबाई 1411 इंच है। प्रहलाद स्तंभ के आस पास की गई खुदाई से पुरातात्विक महत्व के सिक्के मिले थे।

……………………………………………………………………………………………………………………………….

purnea times

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here