हिंदी माध्यम से यूपीएससी की परीक्षा में चयन होने वाले उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट, क्या है कारण ?? पढ़े रिपोर्ट

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साल दर साल हिंदी माध्यम के छात्र यूपीएससी की परीक्षा से दूर होते जा रहे है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है की सिविल सेवा परीक्षाओं में हिंदी माध्यम से चयन होने वाले छात्रों की संख्या गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण वर्ष 2011 से शुरू हुआ जब सरकार ने (CSAT) सीसैट लागू किया । इसके बाद 2013 में सरकार ने परीक्षा के पैटर्न को बदलते हुए मुख्य परीक्षा में दो वैकल्पिक विषयों के बजाय किसी एक विषय को विकल्प के तौर पर छात्र चुन सकते थे। हिंदी माध्यम और अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के यूपीएससी की परीक्षा के चयन होने वाले उम्मीदवारों में बड़ा अंतर आया है। जहां अंग्रेजी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा पास होने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है वहीं हिंदी माध्यम के छात्रों की संख्या में गिरावट अाई है।

हिंदी माध्यम के छात्र दिल्ली में कर रहे है प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने की कार्रवाई।

सीसैट के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्र संघ लोक सेवा आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सीसैट से प्रभावित छात्र मांग कर रहे थे की उन्हें 2019, 2020 और 2021 की परीक्षा देने की इजाजत दी जाए। छात्रों ने आरोप लगाया की शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अनपर पानी फेका और अलग अलग थानों में लेजाकर बंद कर दिया गया, लेकिन कुछ देर बार सभी छात्रों को छोड़ दिया गया।

लाल बहदुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में हिंदी माध्यम से चयन हुए छात्रों की संख्या कम

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लाल बहदुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी मसूरी में प्रशिक्षण ले रहे 370 छात्रों में केवल 8 उम्मीदवारों ने ही हिन्दी माध्यम में परीक्षा दी थी। जबकि 2013 में कुल 268 चयनित उम्मीदवारों में 34 ने हिंदी माध्यम से परीक्षा दी थी। हिंदी माध्यम के विश्वविधालय से पढ़े छात्रों की संख्या में सीसैट लागू होने के बाद कमी अाई है

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