दरभंगा मे स्थापित हुआ 105 साल पुराना वाष्प इंजन।

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दरभंगा आजकल कुछ अलग ही अंदाज में नजर आयेगा, शहर के केंद्र मे स्थिति रेलवे जंक्शन की शोभा बढ़ाने को यहाँ 105 साल पुराने इंजन को स्थापित किया गया है। यह इंजन अपने आप में खास और दुर्लभ हैं। भारत आने के साथ ही इसने तिरहुत रेलवे और तिरहुत के औद्योगिक क्रांति को बनते बिगड़ते देखा हैं। भारतीय रेल के एकीकरण से पहले और बाद के अनुभवों को समेटा यह इंजन तिरहुत और दरभंगा के बहुमूल्य धरोहरों में से एक हैं।

मालूम हो की यह इंजन 1913 मे इंग्लैंड मे बनाया गया था और 1914 मे दरभंगा के तिरहुत रेलवे के अंतर्गत भारत आया। 1994 तक इसने मुख्य रेल मार्ग के साथ लोहट के चीनी मिल से चीनी का स्वाद भारत के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाया। चीनी मिल के विस्तार मे इसकी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका थी। तिरहुत रेलवे के अंतर्गत ना सिर्फ तिरहुत और आसपास पटरियों का विस्तार हुआ, बल्कि रेलवे की पटरियां कारखानों तक भी पहुँची।

लोहट के शेड मे खड़ा इंजन

चीनी मिल के बंद होने के बाद 24 वर्षों तक यह लोहट मिल के शेड मे पड़ा रहा। दरभंगा सिटी टीम ने 24 साल बाद लोहट से इस इंजन को खोज कर विशेष प्रसारण किया, जिसके बाद सिटी टीम और अन्य लोगों की पहल को समस्तीपुर रेल मंडल ने गंभीरता से ले दरभंगा में स्थापना हेतु पहल किया। इंजन चीनी मिल मे अवस्थित होने के कारण बिहार सरकार को रेलवे की ओर से पत्र लिखा गया। जिसपर तुरंत ही सरकार और मुख्यमंत्री की सहमति मिल गयीं। मालूम हो की 21 साल से बंद मिल के घने जंगलों से इंजन निकालना भी इतना आसान नहीं था। पर रेलवे की टीम ने इसे बखूबी अंजाम दिया। सामूहिकता प्रयासों से अतः इस रविवार को वह ऐतिहासिक दिन आ ही गया जब तिरहुत रेलवे के मुख्यालय रहे दरभंगा के जंक्शन पर तिरहुत रेलवे के वाष्प इंजन को स्थापित किया गया।

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