सरकारी स्कूल की छात्राओं ने बिना कोचिंग के सफलता की नई कहानी लिखी । पढ़े पूरी खबर

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सहरसा: एक सरकारी स्कूल की दर्जन भर छात्राओं ने बिना कोचिंग के पारा मेडिकल और पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा में सफलता पाई है। सहरसा शहर के ओबीसी कन्या प्लस टू रेसिडेंशियल हाईस्कूल की छात्राओं ने आपस में ग्रुप स्टडी करके यह मुकाम हासिल किया है।

विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में सफलता

पारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली छात्राएं सीमा कुमारी, प्रिया कुमारी, अंशु कुमारी, रूबी कुमारी, प्रतिमा कुमारी, काजल कुमारी और राबड़ी कुमारी है, तो वहीं पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा में सफल छात्राएं प्रतिमा कुमारी, बेबी कुमारी, अंजनी, शिल्पा और रूही कुमारी है। इसमें कुछ छात्राओं ऐसी है, जिसने दोनों परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं।

तकनीकी निदेशक और शिक्षक गण सफलता के सूत्रधार

इसमें एनआईसी के तकनीकी निदेशक सह डीआईओ एन. एन. मिश्रा के प्रयास को सबसे ज्यादा सराहा जा रहा है। बताया जा रहा है कि उनके द्वारा एक साल पूर्व गोद लेने के बाद इस स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव आया है। छात्राओं को पारा मेडिकल और पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा फॉर्म भरने के लिए डीआईओ ने ही प्रेरित किया था। सफल छात्राओं ने भी अपनी सफलता का श्रेय डीआईओ, स्कूल के हेडमास्टर भूपेन्द्र प्रसाद यादव, शिक्षक गणेश प्रसाद यादव, बलराम दास, मिथिलेश कुमार सिंह, आनंद किशोर झा, किरण कुमारी, अनुपमा, सत्येन्द्र नारायण सिंह, मनोज कुमार मुन्ना और यूनिसेफ की पूर्व अधिकारी डॉ. प्रीति कुमारी को दिया है। तकनीकी निदेशक सह डीआईओ ने बताया कि 10 छात्राओं ने पारा मेडिकल की परीक्षा दी थी। इसमें से 7 छात्राओं ने सफलता हासिल की। पॉलीटेक्निक की परीक्षा में सभी पांच छात्राओं ने सफलता पाई है। इसमें प्रतिमा, बेबी प्लस टू और अन्य तीन छात्राएं दसवीं की है। हेडमास्टर ने बताया कि स्कूल की 36 में से 35 छात्राएं प्रथम श्रेणी से बिहार बोर्ड की परीक्षा में सफलता पाई थी।

स्कूल प्रबंधन ने अलग क्लासेज की व्यवस्था की

ओबीसी कन्या स्कूल में डीआईओ ने केवीसी(नॉलेज बिल्डिंग फॉर कैरियर क्लास) की व्यवस्था कराई। जिसमें छठी से 12 वीं तक की बच्चियों का स्किल डेवलप किया जाता है। कोर्स की पढ़ाई के अलावा प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। तकनीकी निदेशक ने कहा कि छात्राओं को स्कूल के दक्ष हेडमास्टर और शिक्षकों के द्वारा पढ़ाया जाता है। बाहरी विद्यालयों के शिक्षकों को बुलाकर भी चेप्टर वाइज शिक्षा दी जा रही है। यहां क्लास वाइज लाइब्रेरी की सुविधा भी शुरू की गई है। स्कूल को गोद लेने के बाद डीआईओ ने सात छात्राओं को सात बेटी का नाम दिया। उनसे विद्यालय में शिक्षा से संबंधित जरूरी जानकारी ली और उसपर फोकस करते हेडमास्टर व शिक्षकों के साथ मिलकर बदलाव लाने का काम किया।

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