पटना से सहरसा के बीच जल्द मिल सकती है रात्रिकालीन ट्रेन, 2022 तक फ्रेट कॉरिडोर कॉरिडोर निर्माण के बाद सहरसा से चलेगी लंबी दूरी की ट्रेनें

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पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी ने सहरसा जंक्शन का निरीक्षण किया। जीएम के साथ समस्तीपुर के डीआरएम अशोक माहेश्वरी समेत रेलवे के वरीय अधिकारी मौजूद थे सबसे पहले उन्होंने प्लेटफार्म संख्या दो और तीन के बीच बने ग्रीन पार्क का उद्घाटन किया इसके बाद प्लेटफार्म संख्या 2 पर नवनिर्मित लिफ्ट का उद्घाटन कर यात्रियों को समर्पित किया। रेलवे रनिंग रूम का निरीक्षण किया इसके बाद प्लेटफार्म संख्या पांच के पास टिकट बुकिंग काउंटर का निरीक्षण किया। रेलवे द्वारा सहरसा जंक्शन पर किये गए बदलाव को देखते हुए महाप्रबंधक ने एसीएम नरेंद कुमार, सहरसा डीसीआई राजेश रंजन समेत अन्य विभागों के अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मनित किया। उन्होंने कहा कि रेलवे निरंतर यात्री सुविधाओ की बढ़ोतरी कर रही है। प्लेटफार्म संख्या एक पर वैशाली एक्सप्रेस के बारे में कहा कि यह बोर्ड की सबसे प्रीमियम ट्रेन है और इसका मैन्टेन्स वैसे ही किया जाए जैसा दिल्ली और बरौनी में किया जाता था। सरकुलेटिंग एरिया में खाली पड़े जमीन को देखते हुए उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल होना चाहिए और यहा पार्किंग अथवा पार्क का निर्माण किया जाना चाहिए।

80 साल बाद दो भागों में बंटा मिथिलांचल रेल से जुड़ेगा।

जीएम ने कहा कि पिछले एक साल में सहरसा जंक्शन पर कई परिवर्तन आये है। प्लेटफार्म की संख्या बढ़कर पांच हो गयी। स्टेशन पर लिफ्ट और पार्क की सुविधा दी गयी है। इसके साथ ही सहरसा से सुपौल तक बड़ी लाइन की ट्रेनें चलने लगी है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण कार्य 1932 मे मिथिलांचल में जो अंग्रजो के जमाने मे पुल बह गया था जल्द इसपर ट्रेनें चलने लगेंगी। अगले एक से ढेड़ महीने में सुपौल से आगे सरायगढ़ तक ट्रेनो का परिचालन शुरू किया जायेगा। जून तक कोशी महासेतु के रास्ते निर्मली तक ट्रेनो का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। 80 सालों से बंटे मिथिला के दो क्षेत्र सहरसा से दरभंगा निर्मली से जुड़ जाएंगे। जीएम ने कहा की उनकी कोशिश है कि एक साल के अंदर फारबिसगंज तक आमान परिवर्तन कार्य पूरा कर लिया जाए। उन्हीने कहा कि इस क्षेत्र में रेल का विकास तेजी से किया जा रहा है सुपोल से अररिया तक नई रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया गया है। सहरसा से मधेपुरा तक विधुतीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। अगले एक साल तक पूर्णिया कोर्ट तक विधुतीकरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा जिससे इस क्षेत्र में मेमू और डेमू ट्रेन की सुविधा और बेहतर ढंग से मिल पाएगी।

पटना से चल सकती है रात्रि कालीन ट्रैन, 2022 के बाद से नई ट्रेनो का होगा परिचालन

जीएम ने कहा कि सहरसा में आबादी ज्यादा है और कई लोगों ने पटना से रात्रि में ट्रेन चलाने की मांग की है उन्होंने कहा कि इसपर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही कि सुपौल से और ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है उम्मीद है कि सरायगढ़ तक रेल शुरू होने के बाद ट्रेनो की संख्या में वृद्धि होगी। जीएम ने कहा इलाहाबाद डिवीजन में ट्रेनो की संख्या ज्यादा है जिससे ट्रेनें प्रभावित होती है वहां बोतलनेक बन जाता है जिससे नई ट्रेनों का परिचालन करना संभव नही है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। एक अतिरिक्त रेल लाइन होगी जहा तेजी से मालगाड़ियों का परिचालन हो सकेगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सहरसा जंक्शन समेत अन्य स्टेशनों से लंबी दूरी की ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। जीएम ने कहा कि किउल लखीसराय सेक्शन में कुछ रेलवे के ढ़ांचागच काम चल रहे है जिसके पूरे होने के बाद मोकामा पटना किउल सेक्शन पर ट्रेनो की स्पीड बढ़कर 130 हो जाएगी। जिसके बाद सहरसा से खुलने वाली ट्रेनें 4 घंटे में पटना तक सफर कर पायेगी।

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