उत्तर बिहार का डॉन जो कॉर्पोरेट स्टाइल मे चलाता था संगठन, हजारों की तनख्वाह के साथ होती थी भर्ती।

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सीतामढ़ी: उत्तर बिहार में रंगदारी के बल पर विशाल सम्राज्य खड़ा करने वाला संतोष झा की आखिरकार कोर्ट परिसर में हत्या कर दी गई। पूरी घटना सीतामढ़ी व्यवहार न्यायालय में घटी जहां संतोष झा खुद पर तबातोड़ बरसती गोलियां का शिकार हो, न्यायालय परिसर मे ही गिर पड़ा। आम दिनों के तरह चलने वाले व्यवहार न्यायालय देखते ही देखते ही एक बड़े डॉन के खात्मे का गवाह बन चुका था।

पिता की मौत के बदले की लिखी जा चुकी थी पटकथा

18 साल के एक युवक ने पुलिस सुरक्षा में लाये गये संतोष झा के करीब आ उस पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी, कोर्ट परिसर में चली अंधाधुंध गोलियों ने संतोष झा को संभलने तक का मौका नहीं दिया। संतोष झा पर गोलियां चला कर और फिर हथियार फेंक, इस लड़के ने भीड़ मे शामिल हो खुद को उस भीड़ का हिस्सा बनाने की असफल कोशिश की। घटना के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा यह लड़का विकास झा बताया जा रहा है, जो की विनोद झा का बेटा निकाला। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में विकास झा ने बताया है की, उसने अपने पिता विनोद झा की हत्या का बदला लेने के लिए संतोष झा की हत्या को अंजाम दिया। मालूम हो की दस साल की उम्र में ही संतोष झा नक्सलियों के संगठन में शामिल हो गया था। जहां स्थानीय कंमाडर गौरी शंकर झा के साथ उसने कई नक्सली गतिविधियों का अंजाम दिया। शुरुआत में मिली सफलता और पैसों ने संतोष झा को नक्सली संगठन से अलग हो खुद के संगठन बनाने को प्रेरित किया। यही से नक्सलियों और संतोष का संगठन एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। दिसंबर 2012 में संतोष झा ने गौरी शंकर झा के घर पर हमला कर उसे और उसकी पत्नी देवता देवी को गोली मार दी, इसमें गौरी शंकर झा की मौत हो गई। गौरी शंकर की हत्या कर संतोष झा अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन चुका था, बाद मे इसके संगठन ने 2015 मे विनोद झा की हत्या कर दी, जिसने संतोष के मौत की पठकथा भी लिख डाली। करीब तीन साल बाद विकास ने संतोष झा की हत्या कर अपने पिता की हत्या का बदला लिया।

इंजीनिर्यस हत्याकांड के बाद आया था संतोष चर्चाओं में

संतोष झा अपने संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के संग सुर्खियों तब आया था, जब उसने संगठन के माध्यम से समस्तीपुर- वरुणा पुल-रसियारी घाट स्टेट हाईवे की निर्माण एजेंसी बीएससी/सी एंड सी कंपनी से 75 करोड़ रुपये रंगदारी की मांग की थी। रंगदारी से इनकार के बाद 26 दिसंबर 2015 को दरभंगा के बहेड़ी थानाक्षेत्र के शिवराम गांव मध्य विद्यालय के पास, बाइक सवार 4 अपराधियों ने एके-56 से कंपनी के अभियंता मुकेश कुमार और ब्रजेश कुमार की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद सरकार की और बिहार की बहुत बदनामी हुई, जिस के बाद इस गैंग के सफाये को ले पुलिस ने ऑपरेशन शुरू कर दिया। अपराध की दुनिया मे आने के बाद संतोष ने सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी, बेतिया, गोपालगंज, दरभंगा और सीवान में कई अपराध किए। इन जिलों में हत्या, लूट और रंगदारी के तीन दर्जन से अधिक मुकदमे संतोष झा और उसके संगठन पर दर्ज हो गए थे।

ऐसे हुई संतोष झा की अपराध की दुनिया में एंट्री

शिवहर जिले के पुरनहिया थाना अंतर्गत दोसितयां गांव निवासी संतोष झा के पिता चंद्रशेखर झा, गांव के हीं दबंग जमींदार परिवार से तालुक रखने वाले नवल किशोर यादव के जीप का ड्राइवर थे। बाद मे गांव में ही बन रहे पंचायत भवन को ले चंद्रशेखर झा और जमींदार नवल किशोर यादव के बीच ठन गई, जिसे ले संतोष के पिता की नवल किशोर यादव ने पिटाई कर दी। अपने पिता के अपमान से आक्रोशित संतोष नक्सलियों के साथ शामिल हो गया, और 2003 में माओवादियों के साथ मिल नवल किशोर यादव के घर पर पहली बार हमला किया। बाद में 15 जनवरी 2010 को अपने सहयोगियों के साथ सीतामढ़ी के राजोपटटी में पूर्व जिला पार्षद नवल किशोर यादव को उसके घर के बाहर उसने गोलियों से भून दिया, उसने उक्त हत्या को पिता की पिटार्इ का बदला बताया था।

बनाया अपराध जगत की कॉर्पोरेट दुनिया

संतोष झा ने अपराध के दुनिया की अनोखी कॉर्पोरेट कंपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी बनायी, जहां अच्छी सैलरी के साथ लोगों की भर्तियां की जाती थी। शुरुआत मे नक्सलियों से अलग हो संगठन बनाने के बाद मुकेश पाठक, लंकेश झा और चिरंजीवी भगत भी बाद मे इस संगठन के चेहरे बने। इस संगठन के बल पर बड़े व्यपारियो और निर्माण कंपनियों से लेवी वसुलने का काम शुरू किया गया, जिससे धीरे धीरे संगठन के पास धन का सम्राज्य खड़ा ह़ोता गया। इस धन का प्रयोग कर भर्तियां और तनख्वाह के साथ अनेक शहरों मे प्रॉपर्टी पर निवेश पर किया गया। दरभंगा इंजीनिर्यस मर्डर कांड के बाद संतोष झा की रांची से ले कर गुवहाटी तक के बड़े निवेशों का पुलिस को पता चला। अब संतोष की हत्या के बाद, गैंग में नंबर दो मुकेश पाठक के प्रमुख के तौर पर कमान संभालने की बात कही जा रही हैं। मालूम हो की मुकेश पाठक भी इंजीनिर्यस हत्याकांड मे अभी जेल में बंद है। फिलहाल पुलिस इसे गैंगवार के नजरिए से भी देख रही है, एसपी आकाश के मुताबिक मुकेश पाठक से पहले दोस्ती और फिर उससे दुश्मनी इस हत्याकांड की वजह हो सकती है।

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