फुजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल 2018 को संसद की मंजूरी, सरकार का आर्थिक भगौड़ों पर प्रहार का दावा।

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ए के अंशु: सरकार जल्द ही नये बिल को लाने वाली हैं, जिसका नाम फुजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल 2018 (Fugitive Economic offenders Bill) हैं। आसान भाषा में कहे तो यह भगोड़ा आर्थिक अपराधी बिल 2018 हैं।

पीएनबी घापला

विजय माल्या का 9000 करोड़ का मामला हो, या जतिन मेहता का 7000 करोड़ का मामला हो। ललित मोदी, नीरव मोदी और न जाने कितने लोग जो हमारे आपके मेहनत के पैसे लेकर भाग गए। पैसों के गबन कर यह भगौड़े दूसरे देशों में आराम से रह रहे हैं, वहीं लोग सरकार से इसे ले रोज सवाल कर रहे हैं। आम जनता का सवाल है की, आखिर क्यों सरकार इन्हें नही पकड़ रही है। वहीं सरकार का कहना की, कानून कमजोर है और हम बंधे हुए है।

भारत की प्रत्यपर्ण संधि सिर्फ कुछ देशों से

फिलहाल भारत की प्रत्यपर्ण संधि सिर्फ 47 देशों से है, इन वजहो से भी कई रुकावट आ रही है। खैर इस बारे में कभी और बताएँगे, आज हम (FEOB 2018) की बात करते है। इस कानून को बैंकों के पैसों के गबन के वर्तमान समस्या को देखते हुए सरकार लायी है। सीधे और सरल भाषा में बोला जाये तो ये भगोड़ा आर्थिक अपराधी बिल 2018 को मोदी सरकार ने 21 अप्रैल 2018 को कैबिनेट में पास किया। 19 जुलाई 2018 को लोकसभा ने और अब 25 जुलाई 2018, यानि 2 दिन राजसभा में पास होने के बाद इससे राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

क्या है यह बिल?

इस बिल के तहत भारत के बैंकों से गबन किये गए पैसे की वसूली के लिए ऐसे वयक्तियों को इस बिल के तहत कोर्ट तक घसीट कर लाया जायेगा। मामले की सुनवाई के जरिए भारत में उनके वैध और अवैध संपत्ति को सरकार नीलाम करेगी।

●इस बिल के दायरे में कौन आएंगे?

जो भी 100 करोड़ या उससे ज्यादा रूपए लेकर भागेगा उन सब पर यह बिल लागू होगा।

●अब ये बिल कैसे काम करेगा?

मनी लांड्री बिल एक्ट 2002 के तहत एक कोर्ट बनेगी। सरकार डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर और अधिकारियो के मदद से टीम बनायेगी, जो की आरोपी के विरोध में याचिका डालेगी। वहीं कोर्ट 6 हफ्ते का समय देगी, गबन के आरोपियों के हाजिर ना होने की स्थिति मे दोषियों को भगोड़ा साबित कर अधिकारी उनके सारे सम्पति का हिसाब लगया जायेगा। आगे “ED” यानि प्रवर्तन निर्देशालय द्वारा संपत्ति जब्ती होगी और फिर उसकी नीलामी की जायेगी। नीलामी से हासिल पैसे को बकायदारों को दे दी जायेगी।

अब बिल की मजबूती की बात करे तो

इस बिल के तहत जब केस स्पेशल कोर्ट चल में चल रहा होगा तो अपराधी किसी कोर्ट से मदद नही ले सकेंगे। फैसला आ जाने के बाद ही हाई कोर्ट में अपील की छूट होगी। इस बिल की एक और खासियत इस बिल के तहत अपराधी की बैध और अबैध दोनों संपत्ति जप्त की जायेंगी। उस पैसे को देश में सड़क, स्कूल, हॉस्पिटल इन सब के विकाश के लिए खर्चे जायेंगे।

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