मिथिलांचल से बड़ी संख्या में हो रहा लोगों का पलायन, रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने को मजबूर।

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अपने गौरवशाली अतीत को समेटे मिथिलांचल की मुट्ठी में अब रेत-ही-रेत दिखाई पड़ रहा है, अधिकतर गांवों के लोग रोजी-रोटी की तलाश में गांव से खाली होते जा रहे है। यहां से सीधा निकलकर महानगरों का रुख कर रहे है, यह स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है।

गांवो में मुश्किल से ही बचे कुछ लोग

Furniture village, opposite gm road DARBHANGA

उत्तर बिहार के दरभंगा, मधुबनी, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल और सहरसा सहित अन्य कोशी क्षेत्र बेरोजगारी की दंश को भुगत रहा है। बिहार सरकार और यूनिसेफ के साथ पलायन पर काम करने वाली संस्था बिहार सेवा समिति का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है, की कई घरों को मिलाकर सिर्फ सौं लोग ही मिल पाते हैं गांव में।

रोजगार के लिए सरकार द्वारा उठाए ठोस कदम

Alankar Jewellers and sons

मिथिलांचल में सबसे अधिक कमला, कोसी और नदियों के किनारे वाले इलाकों से लोग रोजगार के लिए दिल्ली-मुंबई का पलायन करते है। वहीं मधुबनी और दरभंगा के क्षेत्रों में कमोबेश यही स्थिति देखा जा रहा है। लोगों का अपने घरों से दूर दूसरे शहरों में रोजगार के लिए पलायन होना एक चिंता का विषय बन गया है। सरकार को जल्द ही इस दिशा के कोई कदम उठाना होगा। ताकि पलायन पर रोक लग सके।

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