हरनगर मे रेलवे परिचालन को ले उत्सव जैसा माहौल, डीआरएम का पाग से स्वागत।

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हरनगर: 1951 में क्षेत्र के लोगों का देखा गया सपना आखिरकार 67 साल बाद पूरा हुआ। 1951 मे पहली बार दरभंगा महराज ने कुशेश्वरस्थान हो सकरी तक रेल लाइन का प्रस्ताव रखा था, तब रेलवे ने बाढ़ग्रस्त इलाके की बात कह कर इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। 1972 में तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा ने इसके फिर सर्वे की घोषणा की थी, पर उनके मृत्यु के बाद फाइल दबा दी गई। 1997 में रेल मंत्री रहे रामविलास पासवान ने इसका पुन शिलान्यास किया था,जिसके बाद 2008 मे पहली बार आधी अधूरी तैयारी के बीच सकरी से बिरौल तक ट्रेनों का परिचालन किया गया था।

क्षेत्र मे उत्सव जैसा माहौल

कल हुए सीआरएस के समय लोगों की भीड़ हरनगर स्टेशन पर जुट गई, डीआरएम का पाग के साथ हरनगर मे स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान खुशी का माहौल देखा गया। लोगों ने रेल के आने से हरनगर के विकास और रोजगार पैदा होने की बात कही, साथ ही लोगों ने महानगरों के सीधी सेवा जल्द होने की उम्मीद जाहिर की।

खुलेगे विकास के द्वार

मालूम हो की कुशेश्वरस्थान और आसपास का इलाका बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हैं, ऐसे मे रेलवे अब एक अहम कड़ी साबित होगा। रेल सेवा सीधी यहां तक पहुँचने से स्टेशन के आसपास के क्षेत्र का विकास भी होगा, मालूम हो की कुशेश्वरस्थान मिथिला के बाबाधाम के रूप मे पूरे क्षेत्र में स्थापित हैं। हरनगर कुशेश्वरस्थान से सात किलोमीटर दूर अवस्थित हैं, ऐसे मे भक्तों के लिए बाबानगरी जाने के लिए अब ट्रेन भी एक विकल्प होगा।

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