जयनगर-जनकपुर के लिए चलेंगी डीएमयू सेवा, ट्रेन परिचालन को भारत देंगा लोको पायलट।

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जनकपुर: अगले साल से भारत-नेपाल के बीच शुरू होने जा रही अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा के लिए काम जोरों पर है, चार से पांच महीने में इसके पूरे हो जाने की संभावना हैं। भारत-नेपाल लाईन को जोड़ने हेतु जयनगर में इंटरलॉकिंग का काम शुरू हो चुका है, जिसके बाद मालगाड़ियों के ब्लास्ट ले कर नेपाली लाइन पर पहुँचने का काम शुरू हो जायेंगा। ट्रेन चलाने के लिए लोको पायलट, ट्रेन के इंजन के लिये पेट्रोलियम पदार्थ के भंडारण, कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण की जरूरत महसूस की जा रही हैं। फिलहाल भारत सरकार ने नेपाल रेलवे के कर्मचारियों को भारत में ही प्रशिक्षण देने का फैसला किया गया है।

भारत सरकार नेपाल रेलवे को देंगी लोको पायलेट

प्रशिक्षण पूरा होने तक भारत के लोको पायलट नेपाल मे रेल गाड़ियों का परिचालन करेंगे, जिसका खर्च नेपाल सरकार उठायेंगी। रेल लाइन के निर्माण के मौजूदा हाल में जयनगर को छोड़ कर जयनगर-जनकपुर के बीच पड़ने वाले स्टेशन एवं हाल्ट इनरवा, खजूरी, बैधही, परवाह, महिन्थपुर पर बिजली नहीं होने के कारण इन जगह पर एलेक्ट्रोनिक सिग्नल और अन्य मशीनों का चलना नामुकिन है। बिजली और एप्रोच रोड की उपलब्धता के साथ ही भारत के जयनगर और नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा, मालूम हो की इस रूट पर पिछले 5 वर्षों से आमान-परिवर्तन यानी नैरो गेज रेलवे लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का काम किया जा रहा है।

होगा 10 कोच वाली नई डीएमयू ट्रेन की परिचालन

फिलहाल दिसंबर में दोनों देशों के बीच 10 कोच वाली नई डीएमयू ट्रेन की परिचालन शुरु करने की भी योजना हैं। साथ ही जयनगर स्थित नेपाली स्टेशन के अलावा नेपाली क्षेत्र स्थित सभी स्टेशन एवं हाल्ट पर बिकने वाली रेल टिकट की सारी राशि नेपाल रेलवे अपने पास रख सकेंगा। जिससे वह भारतीय लोको पायलट और नेपाली रेल कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य कार्यों पर खर्च करेंगा।

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