नरकटियागंज-रक्सौल रेल लाइन का सीआरएस पूरा, दिल्ली से उत्तर बिहार हुआ नजदीक

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रक्सौल: 1998 मे घोषित जयनगर-दरभंगा-नरकटियागंज आमान परिवर्तन का आखिरी खंड भी बड़ी लाइन में बदल लिया गया। 42 किलोमीटर लाइन की रेलवे संरक्षा आयुक्त ने स्पीड ट्रायल कर जांच की, जिसे सफल माना जा रहा हैं। जल्द ही संरक्षा आयुक्त अपनी जांच रिपोर्ट विभाग को सौप देंगे, जिसके बाद परिचालन संबंधित औपचारिकता पूरी हो जायेंगी। मालूम हो की इस खंड पर 2014 मे आखिरी बार मीटर गेज की ट्रेन चली थी, जिसके बाद आमान परिवर्तन मे चार साल का लंबा वक्त लग गया।

अगस्त से दौड़ेगी रेल

कल हुए स्पीड ट्रायल में नरकटियागंज से रक्सौल तक ट्रैक, सिगनल, पुलों और स्टेशनों की आयुक्त और उनकी टीम ने जांच की, इस दौरान इस खंड पर स्पीड ट्रायल के लिए आये ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया। इस हाई स्पीड पर ट्रैक की झमता और अन्य पहलुओं की सीआरएस मे जांच हुई, जिस पर ट्रैक खड़ा उतरे। फिलहाल इंटरलॉकिंग और कुछ अन्य कार्यों के अगस्त के प्रथम हफ्ते तक पूरा हो जाने के उम्मीद हैं, जिसके बाद दरभंगा-नरकटियागंज हो बड़ी लाइन की ट्रेनो के परिचालन की शुरुआत हो जायेगी।

करना पड़ा चार साल का इंतजार

चार साल के लबें इंतजार के बाद आखिर वो दिन आ ही गया, जिसका पूरे मिथिला को इंतजार था। दरभंगा-नरकटियागंज रेल लाइन के आखरी खंड को बड़ी लाईन में बदलने का काम पूरा कर लिया गया हैं। इस रेल लाइन द्वारा दरभंगा-गौरखपुर सीधे जुड़ गया हैं और दिल्ली की दूरी भी दरभंगा से अब कम हो सकेंगी। फिलहाल मौजूद रास्ते हो दिल्ली जाने के लिए, समस्तीपुर मे आधा घंटा लोको रिवर्सल मे बर्बाद होता हैं, नये रास्ते हो दिल्ली और गौरखपुर जाने को समस्तीपुर मे तरह लोको रिवर्सल का समय भी नहीं लगेगा। मालूम हो की दरभंगा अजमेर एक्सप्रेस का परिचालन भी इसी मार्ग हो सुनिश्चित हैं, साथ ही कोशी महासेतु होकर भविष्य में सहरसा और पूर्वोत्तर राज्यों से हो दिल्ली के लिए जब ट्रेन चलेगी तो दिल्ली जाना आसान होगा।

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