क्या है 300 करोड़ की लागत से बनने वाली दरभंगा रेल बाईपास का काम, दिल्ली-पूर्वोत्तर राज्यों के बीच होगी सबसे कम दूरी का मार्ग।

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दरभंगा: लंबे इन्तेजार के बाद दरभंगा में बनने वाले रेल बाईपास के जल्द बनने का रास्ता खुल गया। रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है। मंत्रालय की ओर से इस कार्य की राशि का भी आवंटन कर दिया गया।इसके साथ ही डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। जल्द ही दरभंगा से दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों के सबसे अहम कड़ी होगी नयी बाईपास लाइन।

आये मैंप के जरिए समझते हैं 300 करोड़ की दरभंगा न्यू रेल बाईपास के क्या फायदे होगें।

दरभंगा बाईपास से शहर के विकास और विस्तार का नया मार्ग खुल जायेगा, साथ ही दरभंगा जंक्शन पर गाड़ियों का भाड़ भी कम होगा। प्रस्तावित एयरपोर्ट के पास से गुजरने के कारण रेलवे अगर मध्य में एक नये स्टेशन का निर्माण या ककरघटी को नये स्टेशन के रूप में अपग्रेड करता हैं, तो ना सिर्फ दरभंगा को नया बेहतर स्टेशन मिलेगा बल्कि उत्तर बिहार के कई जिलों से एयरपोर्ट तक सीधी ट्रेन सेवा होगी। दरभंगा जंक्शन पर प्लेटफार्म और वांशिंग पीट की कमी के कारण नयी ट्रेन से दरभंगा को वंचित किया जाता रहा है, साथ ही कई ट्रेनों का जयनगर और रक्सौल तक विस्तार भी किया गया हैं। नये स्टेशन से ना सिर्फ दरभंगा को अतिरिक्त प्लेटफार्म मिलेंगे साथ ही भविष्य में रेलवे चाहे तो कोचिंग कॉम्प्लेक्स, लोको शेड और वाशिंग पीट जैसी सुविधाओं का भी विस्तार कर सकता हैं।

असम दिल्ली तक बिना इंजन रिवर्सल किये चलेगी ट्रेन

भविष्य में असम से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों को दरभंगा आ कर लोको रिर्वसल(इंजन आगे से पीछे करना)की समस्या नयी बाईपास के कारण नहीं रहेगी, जिससे राजधानी जैसी ट्रेनों का दरभंगा हो परिचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। मालूम हो की इस रास्ते दिल्ली से असम की दूरी 350 किलोमीटर तक कम होगी। नये बाईपास के निर्माण भर से ही समस्याओं का समाधान नहीं होगा, रेल बाईपास के साथ न्यू दरभंगा स्टेशन तथा बाकी चीजों को भी रेलवे की योजना में लाने के लिए जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रयास की भी आवश्यकता होगी।

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