दरभंगा को नयी दिल्ली और असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों से सीधे जोड़ने की तैयारी, दरभंगा जं – सरायगढ़ जं और ललितग्राम में बनेगा वाई लेग।

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दरभंगा : जल्द ही दरभंगा से दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों तक सीधी ट्रेनों का सपना साकार होगा, मालूम हो की अमान परिवर्तन के तहत 12 साल बाद दरभंगा से झंझारपुर को रेल ब्रॉडगेज नेटवर्क द्वारा जोड़ा जा चुका है। वहीं सहरसा सुपौल हो कर मालगाड़ी सरायगढ़ जंक्शन तक ब्लास्ट पहुँचा चूकी है, इसके अलावा सरायगढ़ की ओर से रेल लाइन को कोसी महासेतु से जोड़ा जा चुका है। इन तैयारियों के बीच रेलवे ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लोकों रिवर्सल से बचने के लिए वाई लेग की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

300 करोड़ की लागत से बनेगा दरभंगा में बाईपास

दरभंगा में ककरघट्टी से सिसो हाल्ट के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबा बाईपास का निर्माण होगा, जिसके बनने से दिल्ली होकर गोरखपुर की ओर से नरकटियागंज सीतामढ़ी होकर जानेवाली मालगाड़ी व मेल एक्सप्रेस सीधे कोसी महासेतु होकर पूर्वोत्तर राज्यों की ओर निकल जायेगी।

पूरी रेल लाइन वाई लेग का काम करेंगी जो जयनगर से आने वाली ट्रेनों को भी बिना लोकों रिवर्सल सीतामढ़ी हो दिल्ली तक का रास्ता देगी। दरभंगा में बनने वाले इस बाईपास पर 300 करोड़ की लागत आयेगी, जिसमें १० किलोमीटर लंबी दोहरी लाइन बिछाई जायेंगीं।

सरायगढ़ जंक्शन और ललितग्राम पर भी होगा वाईलेग का निर्माण।

हाल में ही स्टेशन से अपग्रेड हो कर जंक्शन का दर्जा पाने वाले सरायगढ़ पर भी वायलेग तैयार किया जायेगा, जिससे दरभंगा सहरसा के बीच भी बिना लोकों रिवर्सल ट्रेनें दरभंगा से सहरसा आ जा सकेगी। अमान परिवर्तन के तहत तैयार की जा रही इस रेल लाइन के निर्माण के बाद दरभंगा और सहरसा की दूरी घट कर बहुत कम रह जायेगी।

ललितग्राम रहा है छोटी लाइन का अनूठा स्टेशन

देश के रेलमंत्री रह चुके ललित नारायण मिश्र से जुड़ा ललितग्राम स्टेशन सरायगढ़ और फारबिसगंज के बीच अवस्थित है। इस स्टेशन पर हावड़ा, चेन्नई के तरह रेलवे लाइन आ कर ख़त्म हो जाती है, जिसे फिर लोकों रिवर्सल कर सरायगढ़ और फारबिसगंज की ओर भेजा जाता है। दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने के लिए अब यहाँ भी वाईलेग का प्रावधान किया जायेगा।

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