दरभंगा एयरपोर्ट पोर्टा केबिन के लिये बार बार एक ही टेंडर निकाल फिर उसे रद्द करने का खेल, क्या 2019 के चुनावों के नाम पर है पब्लिसिटी स्टंट

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दरभंगा: एयरपोर्ट के नाम पर 2014 से दरभंगा मे चल रहे सोशल मीडिया अभियान और जबरदस्त मांग के बाद जब उड़ान 2 में दरभंगा का चयन हुआ, तो यह एक सपने के पूरे होने जैसा था। सरकार द्वारा 6 महीने में एयरपोर्ट चालू कर लेने की बात कही गयी। जरूरी बुनियादी सुविधाओं के लिए टेंडर भी निकाले गये, और इसके बाद शुुुरू हुआ इन टेंडर को निकाल उन्हे रद्द कर फिर निकालने का खेल।

चार महीने से हो रहा हैं टेंडर का खेल

दरभंगा एयरपोर्ट पर पोर्टा केबिन के निर्माण को पहली बार 3 अप्रैल 2018 को टेंडर निकाला गया तो लोगों में एक उम्मीद जगी, पर कुछ दिनों बाद उसे रद्द कर फिर से नया टेंडर निकाल दिया गया। कल ही फिर से इस टेंडर के रद्द किये जाने की सूचना आयी हैं। इस तरह से पिछले चार महीने मे अस्थायी टर्मिनल निर्माण के 3 टेंडर रद्द किये जा चुके है, हाल मे ही इसी महीने दरभंगा एयरपोर्ट रनवे से जुड़ा टेंडर रद्द कर फिर से रनवे के लिए निविदा मंगाई गयी हैं। मालूम हो की चार महीने मे दरभंगा में पूरा अस्थायी टर्मिनल बनाया जा सकता था, पर टर्मिनल को छोड़े अभी तक तो इसको ले जनवरी 2018 से अब तक टेंडर तक फाइनल नही हो सका हैं।

एयरपोर्ट पर दरभंगा से संभावित उम्मीदवारों द्वारा खेला जा रहा है क्रेडिट गेम

दरभंगा एयरपोर्ट विशुद्ध रूप से उड़ान योजना और स्पाइसजेट की ओर से दरभंगा मे रूचि दिखाये जाने के कारण हवाई सेवा के लिए चुना गया हैं। इसमें किसी भी नेता का कोई भी भूमिका नहीं है, फिर भी टेंडर और काम को जमीन पर उतारने के जगह कई नेता केंद्रीय मंत्रियों से मिल क्रेडिट गेम मे लगें रहे। एयरपोर्ट चालू करवाने के दावो के बीच मंत्रियों से जमीनी स्तर पर काम काम करवाने और टेंडर को फाइनल कराने की कोशिश ऐसे नेताओं द्वारा हुई ही नहीं, मंत्रियों से मिल समाचार के लिए फोटो खींचा ऐसे नेताओं मे एयरपोर्ट का श्रेय लेने की होड़ मची रही। इधर पटना के लिए आया ऐसा ही पोर्टा केबिन का टेंडर एक बार भी बिना रद्द हुए फाइनल हो गया, पर दरभंगा के नाम पर टेंडर बार बार रद्द कर पूरी योजना को अटकाया जाता रहा।

जमीन अधिग्रहण का नहीं है कोई पेंच

ट्विटर पर दरभंगा एयरपोर्ट के जनवरी से शुरू होने की घोषणा करते नागरिक उड्डयन मंत्री

दरभंगा बिहार का सबसे लंबा रनवे एयरपोर्ट है और यहां पहले से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है। अस्थायी टर्मिनल के लिए एयरफोर्स के तरफ से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को जमीन भी दी जा चुकी हैं। फिलहाल बने बनाये एयरपोर्ट पर अस्थायी टर्मिनल और अन्य कार्यों के लिए सरकार, नये नये तारीखों का एलान कर रही हैं। हाल मे ही दरभंगा रनवे पर लैंडिंग की समस्या देख, जून से प्रस्तावित उडा़न की समय सीमा बढ़ा जनवरी कर दिया गया था। नागरिकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह फैसला लोगों ने स्वीकार किया। पर हाल मे ही रनवे का टेंडर फिर से रद्द होने और अब तीसरी बार पोर्टा केबिन टेंडर रद्द होने के बाद, सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

एयरफोर्स भी सवालों के घेरे में

2014 में दरभंगा सिटी पहली बार बंगलौर से स्पिरिट एयरबेस को पहली बार दरभंगा ले कर आयी थी, तब टर्मिनल और अन्य चीजों के अभाव मे यह सेवा बंद हो गई। इसके बाद दरभंगा सिटी टीम ने दरभंगा एयरपोर्ट के लिए अब तक का सबसे बड़ा सोशल मिडिया अभियान चलाया था, जिसमें लोगों का बढ़चढ़ कर समर्थन मिला। साथ ही दरभंगा चाइना लड़ाई के लिए महत्वपूर्ण है, ऐसा कह कर कुछ लोगों ने यहां से हवाई सेवा का विरोध भी किया। दरभंगा को आज तक एयरपोर्ट बनने से इसी चाइना फेक्टर का सहारा ले कर 2017 तक रोका गया, पर उड़ान मे शामिल होने के बाद रनवे का निरीक्षण करने आयी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने रनवे को लागतार इस्तेमाल लायक ही नहीं बताया। मालूम हो की इसके बाद मिली सूचना के अनुसार दो दशक से ज्यादा समय से एयरफोर्स द्वारा दरभंगा एयरपोर्ट के रनवे का रखरखाव ही नहीं किये जाने की बात सामने आयी, ऐसे में गंभीर सवाल यह भी है की चाईना से लड़ाई की स्थिति मे सेना लागातार अपना जेट विमान दरभंगा के एयरबेस पर कैसे उतारती। फिलहाल दरभंगा एयरपोर्ट पर सरकार के लोगों को भर्मित कर 2019 के माहौल को बनाने की तैयारी मानी जा रही, टेंडर के खेल मे भी अब जनवरी से दरभंगा से उडा़न नामुमकिन दिखने लगा है।

शेष अगले अंक में

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