छठ महापर्व में आज डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे श्रद्धालु

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पटना/सहरसा । लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की तैयारी पूरे बिहार और देश के कोने कोने में चल रही है । चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में महिलाएं निर्जला का कठिन व्रत करती है । इस पर्व में किसी पंडित की जरूरत नहीं होती, परिवार के सभी लोग मिलकर इस पर्व को मानते है । सूर्य की उपासना का महापर्व है छठ । छठ के गीत इस पर्व की महिमा को और बढ़ा देते है । देश विदेश के किसी कोने में बिहार के लोग क्यों न हो जब शारदा सिन्हा के गीत कानों में गूंजती है तो रिश्तों की डोर हमे इस लोक आस्था के महापर्व की तरफ खीच लाती है

छठ पूजा की विधि ।

चार दिनों तक चलने वाले महापर्व की शुरुवात कार्तिक शुक्ल के चतुर्थी से होती है और सप्तमी के सूर्योदय के साथ इस पर्व का समापन होता है । सबसे पहले कार्तिक शुक्ल के चतुर्थी के दिन नहाय खाय के साथ छठ की शुरुवात होती है । इस दिन विशेष रूप से स्वछता का ध्यान रखा जाता है और लोकी और चावल छठ व्रती ग्रहण करती है । दूसरे दिन के व्रत को खरना कहा जाता है । इस दिन छठ व्रतिया पूरे दिन उपवास करती है और शाम को गुड़ से बने खीर का सेवन करती है । छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । इस दिन छठ का महाप्रसाद ठेकुआ बनाया जाता है छठ व्रतियों द्वारा । नदी या तालाब के किनारे सूप में पूजा की सामग्री मौसमी फल, नारियल,ठेकुआ प्रसाद के रूप में प्रयोग होता है और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । पर्व के चौथे दिन सूर्योदय के साथ ही भगवान भास्कर को कच्चे दूध से अर्ध्य देकर पूजा का समापन होता है ।

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