आज नए लुक में चली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, पहले दौड़ में 24 बोगियों में से मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित हुई 9 बोगियां

0
1846

दरभंगा, संतोष कुमार: जी हां यह सजावट भारत के शताब्दी और राजधानी के बाद अहम दर्जा प्राप्त बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की है जो भारत के विभिन्न शहरों से राजधानी तक पहुँचती है । 31 मार्च 2005 से चल रही यह ट्रेन समय की पाबंद हैं और सुपरफास्ट के तौर पर चलाई जाती हैं। दरअसल यह ट्रेन इतनी खूबसूरत है कि आपको भी हैरानी हो जाएगी। इस ट्रेन के आउटर को मिथिला पेंटिंग से सजाया गया है । इस ट्रेन मे नौ बोगियां है जिसमें वातानुकूलित से लेकर स्लीपर क्लास तक कि है ।

डीआरएम श्री आर.के.जैन भी पेंटिंग से सजी बोगी में यात्री बन निकले गंतव्य स्थान को

इस ट्रेन को सजाने में मिथिला की 40 महिलाओं ने जी तोड़ मेहनत की है,और अपनी हुनर की कला को पूरी ट्रेन में उकेर दिया है। बोगियों में उकेरी गई आकृतियों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिथिलांचल विवाह, होलिका दहन, झिझिया, ग्रामीण परिवेश, खेत खलिहानों आदि को बारीकियों से दर्शाया गया है। ट्रेन को मिथिला की सांस्कृतिक विरासत से सजाया कर आज जब दरभंगा से रवाना किया गया तो, इसकी पहली यात्रा के गवाह डीआरएम भी बने। उन्होने इस ट्रेन से दरभंगा से समस्तीपुर तक का सफर तय किया।

डीआरएम, समस्तीपुर को मिथिलांचल संस्कृति एवं धरोहरों के प्रति है विशेस लगाव

दुनिया भर में मशहूर मिथिला पेंटिंग अपने सुनहरे सफर पर निकल पड़ी है। यह डीआरएम समस्तीपुर के नेतृत्व का ही कमाल हैं, जिसमें मिथिला पेंटिंग स्थानीय घरों से निकल स्टेशन और ट्रेनों तक पहुँच गई है। संपर्क क्रांति एक्सप्रेस मिथिला पेंटिंग से ऐसी सजी है, मानों कोई दुल्हन। मालूम हो की इससे पूर्व डीआरएम के निर्देशन में पूर्व में मधुबनी स्टेशन को को मिथिला पेंटिंग्स से सुसज्जित कर कीर्तिमान स्थापित किया गया है। बिहार की संस्कृति को समेटे ये ट्रेन पहली बार शुक्रवार यानी कल दिल्ली पहुंचेगी। पूरे ट्रेन पर मिथिला की कलाकृतियां बनाई गई हैं। जो भी इस ट्रेन को देख रहा है उसकी आंखे इस पर टिक जा रही है। दरभंगा से निकली संपर्क क्रांति को भारतीय रेलवे की कोशिश से दुल्हन की तरह सजाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि आनेवाले कुछ दिनों में कई और ट्रेन मिथिला पेंटिंग की रंग में रंगेंगी।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here