मिथिला पेंटिंग सें रंगी बिहार संपर्क के डिब्बों पर थूक कर, यात्रियों ने भरें अपने रंग।

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दरभंगा: हाल ही में मिथिला पेंटिंग से रंगी बिहार संपर्क क्रांति भारत में अखबारों की सुर्खियां बनी थी, अपने तरह के अनुठे प्रयोग के तहत इस के डिब्बों को सजा कर मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित करने की योजना तैयार की गयीं। पूरी ट्रेन के नौ डिब्बे मिथिला पेंटिंग के साथ तैयार हो जाने के बाद इसे पहली बार दरभंगा से दिल्ली के लिए रवाना किया गया, जिसके पहले सफर के गवाह डीआरएम समस्तीपुर श्री आर के जैन भी बने।

गुटका और पराग की थूक से यात्रियों ने किया इसका स्वागत

इस अनोखी पहल को जहाँ पूरे भारत मे सराहा गया, तो कई यात्री भी इस के पहले सफर का हिस्सा बन गर्वान्वित महसूस करते नजर आये। वहीं कुछ यात्रियों ने गुटका और तंबाकू के पीक से मिथिला पेंटिंग से सजे डिब्बों मे अपना ही रंग भरना शुरू कर दिया। दरभंगा पहुँची ट्रेन के खिडकियों और बाहरी डिब्बों पर थूक और पीक के निशान देखे गये, अपनी धरोहरों से और शहर की पहचान बनने वाली बिहार संपर्क क्रांति ट्रेन के साथ यह एक गंदे मजाक के तरह था। ऐसे यात्रियों ने ना सिर्फ रेलवे के मिथिला पेटिंग के जरिए दरभंगा को पहचान दिलाने की मुहिम को झटका पहुँचाया, साथ ही साथ इस ट्रेन पर मिथिला पेंटिंग करने वाले कलाकारों के मेहनत को भी जाया किया।

हेरिटेज इंजन का भी वही हाल

ऐसे लोगों से बिहार संपर्क क्रांति ही क्या, हेरिटेज इंजन भी अछूता नहीं। दरभंगा जंक्शन के सामने लगे हेरिटेज इंजन के आसपास के क्षेत्रों को इन लोगों ने मूत्रालय बना डाला हैं, यह हाल तब है जब रेलवे ने जंक्शन में ही सुलभ शौचालय की व्यवस्था कर रखी है। ऐसे मे इन तत्वों की मानसिकता पर सवाल उठता हैं, आखिर कब जागेंगे ऐसे लोग।

यात्री करें अपने साथ सफर कर रहे ऐसे तत्वों की पहचान

बिहार संपर्क क्रांति के दरभंगा से दिल्ली और दिल्ली से दरभंगा के सफर के दौरान हर वक्त रेलवे के द्वारा, इन लोगों पर नजर रखना मुश्किल है। ऐसे मे सफर में यात्रा कर रहे यात्रियों को अपने साथ यात्रा कर रहे सहयात्रियों पर नजर रखने की आवश्यकता है, जिसमें पीक से गंदा कर रहे यात्रियों को ट्रेनो पर मिथिला पेंटिंग का महत्व बता कर इसे गंदा करने से रोका जा सके।

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