बिहार के एक शिक्षक ने अपनी सैलरी से छात्र की फीस भरी ,ताकि वह डॉक्टर बन सके, उसकी कामयाबी पर उन्हें गर्व है।

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शिक्षक और छात्र का रिश्ता माता पिता से भी बढ़ कर होता है। एक शिक्षक ही है जो छात्र के जीवन को तैयार कर उसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। बिहार के एक शिक्षक की कहनी HUMANS OF BOMBAY के फेसबुक के पेज से ली गई है। एक शिक्षक ने बताया की एक विद्यार्थी जो पढ़ने में होशियार था लेकिन उसके माता पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी की जिससे वह अपने बेटे को पढ़ा सके। उस छात्र के पास न पहनने के लिए ढंग के कपड़े थे और न ही पढ़ने के लिए किताबे। शिक्षक को ये सब देखकर दया अा गई और उन्होंने निर्णय लिया की वह विद्यार्थी के पढ़ाई के खर्च का निर्वहन करेंगे।

शिक्षक के फैसले से छात्र की किस्मत बदली।

शिक्षक ने निर्णय लिया कि वह अपनी तनख्वाह से छात्र के कॉपी, किताब,कलम और स्कूल यूनिफॉर्म का खर्च उठाएंगे। एक समय ऐसा भी आया जब परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई तब शिक्षक ने अपनी सैलरी से उस लड़के की स्कूल फी भड़ने का फैसला किया। शिक्षक के मुताबिक उनकी सैलरी से इतने पैसे अा जाते थे की घर खर्च आसानी से चल जाए। शिक्षक ने कुछ बचाने के बदले उस छात्र की जरूरतों पर खर्च किया ताकि वह अच्छा डॉक्टर बन सके।

उस लड़के के डॉक्टर बनने के साथ साथ शिक्षक ने अपनी पूरी जिंदगी जी ली है

स्कूल के बाद छात्र ने कॉलेज में लोन लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने डॉक्टर बनने के लक्ष्य को नहीं छोड़ा। छात्र ने पढ़ाई के साथ साथ अलग से कुछ काम भी करता ताकि वह अपनी जरूरत की किताबों को खरीद सकता था। आज वह लड़का एक अच्छा डॉक्टर बन गया है। शिक्षक कहते है उन्हें उस छात्र की कामयाबी पर बहुत गर्व होता है, वह डॉक्टर बनने के बाद हर दूसरे हफ्ते शिक्षक का हाल चाल पूछने गांव आता है, शहर के जरूरी कामों को छोड़ डॉक्टर बनने के बाद गांव आना नहीं भूलता। शिक्षक ने कहा उन्होंने उस छात्र के तब से देखा है बढ़ते हुए जब उसके पास ना यूनिफॉर्म थी और न ही किताबे, उसके डॉक्टर बन जाने के बाद शिक्षक ने कहा की जैसे उन्होंने इसके जीवन के साथ अपनी पूरी जिंदगी जी ली है।

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