बनमनखी उपेक्षित क्यूं,एशिया का सबसे बड़ा चीनी मिल यही है।

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बनमनखी (रमेश अग्रवाल) बनमनखी बाजार मुख्य रुप से दो भागों मे विभक्त है। यह विभाजन रेखा भारतीय रेलों की पटरियां हीं करती है।रेल के उसपार राजहाट मवेशी हाट आदि लगते है। पशुओं की बक्री के लिए यह बड़ी हाट है।बनमनखी के हर आदमी को इसपार या उस पार जो रेलवे के विभाजन के कारण है ,आना जाना पड़ता है।यहाँ बड़े ओभर फुटब्रिज की आवश्यकता है।भारतीय रेल विभाग भविष्य के विस्तार को ध्यान मे रखकर इस ब्रिज का प्राकल्न तैयार करे ।बिहारीगंज बनमनखी लाईन भी 2019 मे चालू हो जाऐगा। प्लेटफार्म से बाहर से यह पैदल फुट ओभरब्रिज बने और पुरी रेल पटरियां पार कर भविष्य के विस्तार को ध्यान रखकर इसका निर्माण शुरु हो।

बनमनखी जंक्शन मे से उतर कर निम्नांकित ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलो तक जाया जाता है ।भक्त प्रहलाद नृसिंह स्तंभ मंदिर ,बाबा मेहीं तपोभूमि ,हृदयश्वरी दुर्गा मंदिर डेढ़ किलोमीटर धीमा प्राचीन शिवमंदिर जहाँ स्वंयभू शिवलिंग है दूरी तीन किलोमीटर प्राचीन गढ़ के टीले आदि स्थान है।बनमनखी अनुमंडल है ।यहाँ अनुमंडल कार्यालय ,प्रखंड कार्यालय अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ऑफिस, व्यवहार न्यायालय
आदि तमाम सरकार के कई विभागों के कार्यालय है। बनमनखी मे भारतीय स्टेटबैंक,बैंक ऑफ बड़ौदा ,यूनाइटेड बैंक,सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक,कैनरा बैंक ,बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण बैंक कोपरेटिव बैंक भूमि विकास बैंक सहित अन्य बैंक कार्यरत हैं।करीब करीब सैकड़ों अधिकारी कर्मचारियों को बनमनखी से पुर्णियाँ जाना आना पड़ता है फिर भी रेल परिचालन या सेवा कामचलाऊ ।रेल फेरे बढ़ाने की माँग कोशी विकास मोर्चा आदि संगठन राजनैतिक दलो ने भी किया समय समय पर पत्राचार भी हुआ पर भारतीय रेल अधिकारियों के कानों पर जूँ भी नही रेंगती।।

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