बागमती एक्सप्रेस चलेंगी एलएचबी कोचों के साथ,आसान होगा मिथिला से दक्षिण भारत तक का सफर।

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दरभंगा से मैसुर के लिए चलने वाली बागमती एक्सप्रेस को आधुनिक तरीके के एलएचबी कोच से निर्मित कर परिचालित किया जाएगा। नये एलएचबी रैंक के साथ परिचालन होने के साथ ही इसमें सफर करने वाले यात्रियों की सुविधाओं मे विस्तार होगा, साथ ही ट्रेन की रफ्तार भी बढ़ेगी ‌।

मिथिला से दक्षिण भारत को जोड़ती है बागमती।

मालूम हो की बागमती दक्षिण भारत के चेन्नई और बेंगलुरु से मिथिला और आसपास के नजदीकी क्षेत्र को रेल मार्ग से जोड़ती है। बता दें कि दरभंगा से मैसुर के लिए हर मंगलवार को बागमती एक्सप्रेस का परिचालन किया जाता है। 12577 नये सिरे से एलएचबी कोच के साथ 26 फरवरी को दरभंगा से मैसूर के लिए पहली बार चलेंगी, वहीं ट्रेन संख्या 12578 एक्सप्रेस 2 मार्च से एलएचबी कोच में परिवर्तित होकर परिचालित होगी। फिलहाल इसमें 23 बोगी हैं, नये तरीके से निर्मित कोच के साथ बागमती को 22 बोगियों के साथ चलाया जाएगा। इसमें 2 जनरेटर वान और रसोई यान भी जुड़े होंगे।

ट्रेन में होगी यह तकनीकी विशेषता।

तकनीकी रूप से बनाए गए इस ट्रेन में ब्रेक पाइप, फीड पाइप और ब्रेक की स्थिति की जानकारी को लेकर इसमें अलग से मीटर लगाया गया है। जहां 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से इन बोगियों के रैक को चलाया जा सकता है। विभिन्न कोचों की तुलना में यह वजन में दस प्रतिशत हल्की होगी। इसमें डिस्क ब्रेक, एयर कंडीशनिंग के लिए बेहतर वायु प्रवाह, बड़ी खिड़कियां, ध्वनि इंसुलेशन जैसी कई सुविधाएं प्रदान की गई है। माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित उच्च क्षमता वातानुकूलन प्रणाली को लगाया है। इसका पेंट्रीकार भी एसी होगा। इससे हर मौसम में यात्रियों को बराबर लाभ मिलेगा। दुर्घटना के दौरान डिब्बों में टकराव होने की स्थिति में हताहतों की संख्या को कम करने के लिए इसमें खास तरह का यंत्र लगाया गया है। साफ-सफाई व बेहतर शौचालय का भी इसमें काफी ख्याल रखा गया है। एलएचबी डिब्बों में एक आईजीबीटी आधारित बैटरी चार्जर है। इन डिब्बों में स्पेशल दूरबीन लगा है। पटरी से उतरने या टकराव की स्थिति में यह बेहतर काम करता है। 1बढ़ेगी बर्थ की क्षमता 1दो बोगियों को जोड़ने वाली कपलिंग के गेप को कम कर एचएलबी बोगियों की क्षमता को बढ़ाया गया है।

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