पहली पुण्यतिथि: दिल्ली- असम वाया दरभंगा 350 किलोमीटर दूरी कम करनेवाली कोसी रेल महासेतु का निर्माण कर, मिथिला के विकास की लिख दी अटल कहानी।

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दिल्ली: देश के महानतम प्रधानमंत्रियों के श्रेणी मे शुमार अटल बिहारी वाजपेयी जी अब भले हमारे साथ ना हो, पर दरभंगा और कोसी का भाग्योदय करने वाली ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर और कोसी रेल महासेतु जैसी संरचना के लिए मिथिला के लोगों हमेशा अटल जी को याद करेंगे। आये जानते हैं अटल जी की दूरदर्शिता ने कैसे बदला मिथिला का भाग्य और क्या होगें इसके दूरगामी प्रभाव।

ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर से विकास की लिखी कहानी

दरभंगा 1970 तक उत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर हुआ करता था। 1970 के बाद परिस्थितियों ने ऐसे करवट लिया की दरभंगा की स्थिति दिन पर दिन गिरती ही रही, ईधर कोसी पार के जिले भी कोसी के रौद्र रूप से सताये और विकास की धारा से अछूते थे। 1996 आते आते दरभंगा सहित कोसी पार के जिलोंं की स्थिति बद से बदतर होती चली गई, सरकारों की उपेक्षाओं के दौर ने इन क्षेत्रों में रोजगार को खत्म कर पलायन को शीर्ष तक पहुँचा दिया।

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कुछ ही समय बाद अटल जी के नेतृत्व मे एनडीए की सरकार केंद्र में सत्तारूढ़ हुई और पोरबंदर से सिलचर तक को एक एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार हुई। बिहार से हो कर इसे मुजफ्फरपुर- बरौनी- बेगूसराय होते पूर्णिया से गुजरना था, अटल जी ने सड़क की एलाइनमेंट चेज करते हुए इसे विकास से अछूते क्षेत्र से ले जाने को कहा और फिर देखते ही देखते ही इस एक्सप्रेस वे का मुँह मुजफ्फरपुर से दरभंगा- झंझारपुर- सुपौल की ओर मोर दिया गया। निर्माण शुरू हुआ और दरभंगा झंझारपुर होते हुए यह सरकार पूर्णिया तक पहुँँची, इसके साथ ही भौगोलिक तौर पर उत्तर बिहार के बीचों बीच अवस्थित दरभंगा फिर से ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के साथ उत्तर बिहार के केद्र की तरह स्थापित होना शुरू हो गया।

सीधे जुड़े दरभंगा और कोसी पार के क्षेत्र, दरभंगा उभरा व्यपारिक केंद्र के तौर पर।

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ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के लिए सुपौल के कोसी नदी पर 2 किलोमीटर लबें फोर लेन महासेतु का निर्माण राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण ने किया, कोसी सड़क महासेतु के खुलते ही दो भागों मे बटा मिथिला एक हो कर जुड़ गया, दोनों हिस्सों के रिश्ते फिर से मजबूती से जुड़ने लगें। इसका आर्थिक फायदा भी मिला, जहां दरभंगा को कोसी का बड़ा बजार मिला, वही गुजरात से असम तक दरभंगा हो के गुजरती सड़क ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाया।

कोसी रेल महासेतु

अटल जी कोसी में सड़क तक ही नहीं रूके, उन्होने एक बार फिर निर्मली से आगे ट्रेन ले जाने का फैसला किया। मालूम हो की दरभंगा- निर्मली हो फारबिसगंज रेलवे का कभी ट्रंक रूट हुआ करता था। 1934 मे आयी आपदा मे कोसी ने अपना रास्ता बदला और उसी दिन से ट्रेनें दरभंगा से निर्मली तक ही सिमट गई। 1934 से अटल जी से पहले कितनी ही सरकार आयी और गई, पर किसी ने इसे फिर से खोलने का प्रयास नहीं किया। प्रधानमंत्री रहते अटल जी ने 400 करोड़ की लागत से कोसी पर रेल महासेतु की आधारशिला रखी।

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मालूम हो की कोसी रेल महासेतु अब बनकर तैयार हैं, और सकरी- झंझारपुर- निर्मली- सहरसा- फारबिसगंज अमान परिवर्तन का काम चल रहा है। साथ ही अररिया-गलगलिया नयी लाइन पर भी काम जारी है, जिसके खुलते ही नरकटियागंज- रक्सौल- सीतामढ़ी- दरभंगा- झंझारपुर- निर्मली- फारबिसगंज- अररिया- गलगलिया हो दिल्ली को असम और पूर्वोत्तर राज्यों की दूरी 350 किलोमीटर तक कम कर देंगा। अटल जी की देन कोसी महासेतु रेल के रूप मे इस क्षेत्र का दूसरा ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर होगा।

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